Dharam/उत्पन्ना एकादशी आज, अगले चार दिन होंगे विशेष दान पुण्य के

जयपुर। भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय मार्गशीर्ष मास चल रहा है। इसी माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी पर सोमवार को उत्पन्ना एकादशी है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। एकादशी की शुरूआत उत्पन्ना एकादशी से हुई थी

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Dharam/जयपुर। भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय मार्गशीर्ष मास चल रहा है। इसी माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी पर सोमवार को उत्पन्ना एकादशी है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। एकादशी की शुरूआत उत्पन्ना एकादशी से हुई थी, जिसकी वजह से यह नाम पड़ा। इसे वैतरणी एकादशी भी कहा जाता है, यानी मोक्ष प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखने की प्रथा है।

एकादशी के दिन ही द्वादशी भी आ जाएगी जो मंगलवारी प्रदोष कहलाएगी। इसके अगले दिन मासिक शिव रात्रि मनाई जाएगी और फिर दर्श अमावस्या मनेगी। यानी अगले चार दिन धार्मिक महत्व के होंगे। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। एकादशी मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी, जिसके कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। इसी दिन से एकादशी व्रत शुरू हुआ।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार सोमवार को वैतरणी एकादशी का व्रत रहेगा। इसे करने से अश्वमेघ यज्ञ व तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है। ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी के दिन से ही एकादशी व्रत करने की शुरूआत की जाती है। स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी माता के जन्म की कथा सुनाई थी।

भगवान ने एक कन्या को एकादशी नाम व वरदान दिया। इस व्रत के पालन से मनुष्य जाति के पापों का नाश होगा और उन्हें विष्णु लोक मिलेगा। तब से एकादशी व्रत प्रारंभ हुआ तभी से एकादशी को परंपरा में इतना महत्व दिया गया। एकादशी के साथ ही प्रदोष व मासिक शिव रात्रि आ रही है, जो दान पुण्य के लिए खासी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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