कार्तिक माह की पूर्णिमा आज , मंदिरों में सजेगी महारास की झांकी

जयपुर। छोटी काशी में 23 नवंबर को कार्तिक माह की पूर्णिमा पर देव दिवाली हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। शहरभर के मंदिर- घर  दीपकों से जगमग होंगे।  वहीं अराध्य गोंविददेवजी मंदिर में मंहत अंजनकुमार गोस्वामी के सान्निध्य में रास पूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा।

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जयपुर। छोटी काशी में 23 नवंबर को कार्तिक माह की पूर्णिमा पर देव दिवाली हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। शहरभर के मंदिर- घर  दीपकों से जगमग होंगे।  वहीं अराध्य गोंविददेवजी मंदिर में मंहत अंजनकुमार गोस्वामी के सान्निध्य में रास पूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा। श्रीजी को सुनहरे पारचे की विशेष पोशाक अंलकार धारण करवा कर फूलों से शृंगार किया जाएगा। रात्रि 8 बजे ठाकुरजी की महारास की झांकी सजाकर मावा लडड् व खीर का भोग लगाया जाएगा।
उधर रामचन्द्रजी का मंदिर, गलताजी, गोनेर रोड़ स्थित राधाकृष्ण मंदिर में दीपदान के साथ विशेष अनुष्ठान होंगे। ठाकुरजी को धवल पोशाक धारण करवाई जाएगी और महारास की झांकी सजाई जाएगी। मंदिरों और घरों में घी के दीपक जलाए जाएंगे।
तीर्थ स्थलों पर उमडेÞगी श्रद्वा
कार्तिक पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान का विशेष महत्व होने से इस दिन कार्तिक स्नान करने वाला महिलाओं के अलावा आम लोग भी बड़ी संख्या में स्नान करने पंहुचेंगें। कार्तिक स्नान वाली महिलाएं पुष्कर, लोहार्गल व गलता तीर्थ में स्नान करने पहुचेंगी और सरोवरों के तट व मंदिरों में दीपदान करेगी।
गोनेर स्थित जगदीश मंदिर में भी हजारों की संख्या में कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं परिक्रमा एवं दीपदान करने के लिए पहुंचेगी। गोनेर में इस दिन मेले का सा माहौल रहेगा। इस दिन तीर्थ स्थलों व मंदिरों में श्रद्वा उमड़ेगी। इसके साथ ही कार्तिक स्नान का समापन हो जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा में के एक दिन शेष होने की वजह से शुक्रवार को श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ेगी। गलता पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि शुक्रवार को आने वाले हजारों श्रद्धालु महिला-पुरुषों की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालु तीर्थ स्नान के बाद पयोहारी बाबा के सिद्ध धुणा की भभूत ग्रहण करते हैं। महाराज के सानिध्य में चल रहे अन्नक्षेत्र के प्रति भी लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।
चलेगा दान-पुण्य का दौर
देव दिवाली को महापुनित पर्व माना गया है। इस दिन लोग गंगा स्न्नान , तीर्थ स्न्नान करते है और दीपदान करते है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन यक्ष हवन और उपासन करते से विशेष पुण्य अर्जित होता है। जिसके चलते श्रद्धालु द्वारा दान- पुण्य का दौर चलेगा।
पौराणिक कथा
देव दिवाली मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित कने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इस खुशी में देवताओं ने दीपक जला कर खुशी मनाई, जिसे आगे चलकर देव दिवाली के रुप में मनाया जाने लगा।

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