राजस्थान ललित कला अकादमी एवं भारतीय शिल्प संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न 

जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी एवं भारतीय शिल्प संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी एवं कला प्रदर्शनी का  समापन हुआ। समापन सत्र में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

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Rajasthan Fine Arts Academy and Indian Institute of Craft
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जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी एवं भारतीय शिल्प संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी एवं कला प्रदर्शनी का  समापन हुआ। समापन सत्र में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समापन सत्र के मुख्य वक्ता नेशनल एकेडमी अवॉर्ड विजेता सिरेमिक आर्ट एक्सपर्ट पी.आर. दरोज थे। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष अश्विन एम. दलवी, सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार सोनी, संगोष्ठी के संयोजक सी.एस. मेहता, भारतीय शिल्प संस्थान की डायरेक्टर डॉ. तूलिका गुप्ता उपस्थित थे।
राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार सोनी के अनुसार संगोष्ठी के अंतिम दिन के प्रातःकालीन सत्र ‘‘इंजीनियस टेडिशन्स: रोड़ अहेड’’ को अहमदाबाद से आए इन्टीरियर डिजाइनर आसिफ शेख, जयपुर की आर्किटेक्ट ऋतु खण्डेलवाल, वरिष्ठ कला समीक्षक राजेश व्यास और भारतीय शिल्प संस्थान की असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. मनीत कौर ने सम्बोधित किया।
संगोष्ठी के संयोजक सी.एस. मेहता ने बताया कि आमतौर पर यह माना जाता है कि ललित कला अकादमी केवल आधुनिक कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए स्थापित है, लेकिन भारतीय शिल्प संस्थान एवं अकादमी की इस संयुक्त भागीदारी को ऐतिहासिक शुरूआत माना जाएगा। हालांकि अब तक पारंपरिक लोक एवं आदिम कलाओं के उत्थान के प्रति कला शिक्षा में कोई विशेष सरोकार नहीं रहा है। संगोष्ठी के माध्यम से ऐसा पहली बार हुआ है कि दृश्य कला एवं शिल्प के विशेषज्ञ एक ही मंच पर विचार-विमर्श के लिए उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी की वैचारिक संरचना बहुत ही पुख्ता है और इसमें ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सत्रों मे शामिल किया गया है जो मानव संसाधन के इन उपेक्षित क्षेत्रों में बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
इससे पूर्व संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए भारतीय शिल्प संस्थान की असिस्टेन्ट प्रोफेसर मनीत कौर ने अपनी प्रजेंटेशन में उड़ीसा की बोण्डो जनजाति की रिन्गा फैब्रिक, असम की बोड़ो जनजाति के बुनकारी क्राफ्ट, अरूणाचल प्रदेश की तवांग जनजाति की मौजाज के अलावा शांति निकेतन की बाटिक कला के ईकोसिस्टम पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ कला समीक्षक डॉ. राजेश व्यास ने मौलेला आर्ट, इस्टॉलेशन, गुफा आर्ट, नाथद्वारा की पिछवाई और बिहार की मधुबनी पेंटिंग आदि की कलात्मक यात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए लोक एवं आदिम जनजीवन में मुहावरों के माध्यम से कला के सौन्दर्य को अभिव्यक्त किया। वरिष्ठ आर्टिकेक्ट ऋतु खण्डेलवाल ने अपने सत्र में भारतीय कला एवं शिल्प के इंटरनेशनल मार्केटिंग कॉन्सेप्ट्स पर विचार प्रकट किए।

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