कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ

जयपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर समर्पण गौशाला परिवार जयपुर की ओर से श्रीगोविन्द देव जी मंदिर परिसर में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथामृत का भव्य आगाज हुआ इससे पहले बुधवार को सुबह सुबह 7.30 बजे गवास जी का रास्ता से कलश शोभायात्रा का आयोजन हुआ।

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जयपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर समर्पण गौशाला परिवार जयपुर की ओर से श्रीगोविन्द देव जी मंदिर परिसर में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथामृत का भव्य आगाज हुआ इससे पहले बुधवार को सुबह सुबह 7.30 बजे गवास जी का रास्ता से कलश शोभायात्रा का आयोजन हुआ। मुख्य ट्रस्टी अनिल शर्मा ने बताया कि पीताम्बर साडी में 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर शोभायात्रा को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।

यही नहीं श्रद्धालुओं ने भी मार्ग में शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया और श्रीमद भागवत को नमन किया। ट्रस्टी नंदकिशोर शर्मा ने बतायाकि इस अवसर पर सिर पर कलश रखे महिलाएं मंगल गीत गा रही थी। शोभायात्रा हवामहल बाजार, हेरिटेज गेस्ट हाउस होते हुए कथा स्थल श्री गोविन्द देव जी मंदिर पहुंची। यहां पर कलश शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद व्यासपीठ पर विधि विधान से कलश स्थापित कर पूजन किया गया।
मीडिया प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि कथा वक्ता गो भक्त संजीव कृष्ण ठाकुर ने प्रथम दिन श्रीमद्भागवत कथा का महातम्य बताया। कृष्णकुमार ठाकुर ने कहा कि श्रीमद्भागवत पंचम वेद है।

यह ग्रंथ जीव को भय से मुक्त कर भाव में प्रवेश कराता है और जीव जब भाव में प्रवेश करता है तो भव से मुक्त हो जाता है। भागवत श्रवण से जीव का चित्त निर्मल होता है और पवित्र चित्त में ही चितचोर श्रीकृष्ण प्रवेश करते हैं।कई जन्मों के पुण्यों का उदय होता है तब जीव को भागवत श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। हम सभी भाग्यशाली हैं जो भारत में हमें जन्म मिला है। भागवत सुख स्वर्ग में भी नहीं मिलता।

देवता तक भागवत श्रवण के अधिकारी नहीं हैं। शुक्रदेव जी ने राजा परीक्षित को तो भागवत सुनाई पर देवताओं को मना कर दिया। यह मानव जन्म मिलना ही सौभाग्य की बात है। भारत में जन्म और मानव जन्म दोनों मिलने के बाद जिसने भागवत का पान ना किया उस व्यक्ति ने मानों अपनी आत्महत्या कर ली हो। भागवत श्रवण से मुक्ति तो होती ही है साथ ही जीवन के संदेहों का निवारण भी होता है। भागवत बोध कराने वाला ग्रंथ है।

जिसे बोध हो जाता है वह किसी के विरोध में नहीं रहता। वह सारी सृष्टि के प्रति भगवदीय भाव रखने लगता है। यह कथा की ही तो महिमा थी जिसके कारण धुंधकारी जैसा बड़ा पापी भी कथा सुनकर प्रेत योनि से मुक्त हो गया। पितृं की मुक्ति के लिए भागवत से श्रेष्ठ कोई साधन नहीं है। कलियुग में कथा ही हमारी व्यथा को मिटा सकती है। कथा 22 मई 2018 तक चलेगी।

हवामहल बाजार, हेरिटेज गेस्ट हाउस से श्री राधागोविन्द देवजी मंदिर में समर्पण गौशाला परिवार जयपुर की ओर से श्रीमद्भागवत कथामृत का आयोजन गो भक्त संजीव कृष्ण ठाकुर के सानिध्य में 16 मई से 22 मई 2018 तक किया जाएगा। कथा महोत्सव की जानकारी देते मीडिया प्रळारी पवन ने बताया कि श्रीमद भागवत कथा का भव्य आगाज श्रीमद भागवत जी की कलश शोभायात्रा के साथ होगा।

उन्होंने बताया कि शोभायात्रा बुधवार 16 मई को सुबह 7.30 बजे गवास जी का रास्ता, हवामहल बाजार, हेरिटेज गेस्ट हाउस से श्री राधागोविन्द देवजी मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद भागवत का विधिपूर्वक पूजन किया जाएगा। इसके बाद कथा आरम्भ होगी। उन्होने बताया कि कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5.30 बजे तक रहेगा। प्रथम दिन श्रीमद भागवत कथा महातम्य के बारे में मंथन होगा। इसी प्रकार सातों दिन अलग अलग चरित्रों पर वर्णन किया जाएगा। इसके साथ ही मनमोहक झांकियां भी सजाई जाएंगी।

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