भंवर म्हाने पूजण दे गणगौर.. जैसे गीतों से गूंज उठी राजधानी

महिलाओं और युवतियों ने गुरुवार को पारम्परिक तरीके से ईसर-गणगौर की पूजा की। बैंड-बाजों की मधुर स्वरलहरियों और ढोल-ढमाकों के बीच महिलाएं और युवतियां कुएं, हैंडपम्प और जलाशयों से जल लेने पहुंची। बाद में ईसर-गणगौर की कथा सुनी।

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जयपुर। महिलाओं और युवतियों ने गुरुवार को पारम्परिक तरीके से ईसर-गणगौर की पूजा की। बैंड-बाजों की मधुर स्वरलहरियों और ढोल-ढमाकों के बीच महिलाएं और युवतियां कुएं, हैंडपम्प और जलाशयों से जल लेने पहुंची। बाद में ईसर-गणगौर की कथा सुनी।

शहर के कई इलाकों में महिलाएं और युवतियां श्रृंगार कर कुएं और हैंडपम्प पर जल लेने पहुंची।
कलश और लोटे में हरी दूब, गुलाब, मोगरे, गैंदे और अन्य रंग-बिरंगे फूल लाकर घरों में भगवान शंकर और पार्वती के रूप में ईसर.गणगौर का पूजन किया।

महिलाओं ने भंवर म्हाने पूजण दे गणगौर…. गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती…. खोल ये गणगौर माता…..और अन्य गीत गाए। शहर में जगह-जगह बैंड-बाजों की मधुर धुनें सुनाई दीं। कई जगहों पर सामूहिक गणगौर पूजन हुआ। महिलाएं ढोल-ढमाकों के साथ उद्यान में जैले लेने पहुंची। जल और पुष्पों से ईसर-गणगौर का विधि-विधान से पूजन किया।

8 अप्रैल को गणगौर पर्व, कई महिलाओं करेंगी उद्यापन

जानकारी के अनुसार 8 अप्रैल को गणगौर पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार शहर में कई विवाहिताओं द्वारा उद्यापन किए जाएगे। घरों में 18 महिलाओं को बुलाकर घेवर, नुक्ती, गुलाब जामुन, आलू की सब्जी, पूड़ी, नमकीन और अन्य पकवान खिलाकर उपहार दिए जाएगे। सुहागिनों ने सास-ननद, जेठानी और विवाहिताओं को सुहाग की सामग्री भेंट की जाएगी। महिलाओं ने ईसर-गणगौर को परम्परानुसार भोग लगा कर पानी पिलाया जाएगा।

उत्तर भारत के राज्यों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है

गणगौर का त्यौहार उत्तर भारत के राज्यों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है राजस्थान में घर-घर महिलाएं श्रद्धा के साथ गणगौर माता का 16 दिन उत्सव मनाती है। विशेषकर नवविवाहित के घर में गणगौर रखे और पूजे जाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

इसे गौरी तृतीया और सौभाग्य गौरी व्रत भी कहते है। जयपुर में यह पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है 16 दिन बाद गणगौर माता की सवारी राजसी ठाट बांट के साथ सिटी पैलेस से निकलती है।
गणगौर दो शब्द से बना है जिसमें गण का मतलब शिव और गौर का मतलब इस त्यौहार में भगवान शिव ने पार्वती जी को तथा पार्वती जी ने सभी स्त्रियों को सौभाग्य का वरदान दिया था।

इसी के प्रतीक के रूप में गणगौर को माना जाता है। यह व्रत कुंवारी लड़कियाँ अच्छे पति की कामना से व्रत रखती होली के दूसरे दिन के बाद से ही गणगौर बनाने का क्रम शुरू हो जाता था। इस कड़ी में नवविवाहित युवतियों ने एकत्रित होकर गणगौर बनाई। इससे पूर्व सभी एकत्रित होकर लोकगीत गाते हुए कुम्हार के घर से मिट्टी लाईं और उसके बाद गणगौर-ईशर आदि बनाकर उनकी पूजा की। महिला आंचल ने बताया कि गणगौर पूजन को लेकर युवतियों में उत्साह है। पहली बार गणगौर पूजन कर रही मीना ने बताया कि नवविवाहिताओं के लिए गणगौर पूजना जरूरी होता है।

गणगौर के एक दिन पहले सिंजारा

गणगौर के एक दिन पहले सिंजारा का त्योहार मनाया जाएगा। सोलह शृंगार कर इस दिन महिलाएं महंदी लगाएगी और घेवर खाएगी। गणगौर का पर्व 8 अपै्रल को मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि को सोलहवें दिन गणगौर पर्व के रूप में मनाया जाएगा।

इस दिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए सोलह श्रृंगार कर गणगौर पर्व मनाएंगी। गणगौर के दिन घेवर, मीठे गुणे और सोलह शृंगार की सामग्री से मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा में पूरे परिवार की महिलाएं एक साथ शामिल होती हैं। मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर और विवाहित महिलाएं सुहाग की रक्षा के लिए पूजा करती हैं।

सोलह श्रृंगार कर सुहागिनें पूजेंगी गणगौर

पूजन दो गणगौर, भंवर म्हाने पूजन दयो गणगौर गीत की गूंज राजधानी की हर गली- महौल्लों में सुनाई दे रही हैं।
खास तौर पर उन घरों में जिनके घरों में इस साल शहनाई बजी है। नवविवाहिताओं की पहली गणगौर होने से घरों में उत्सव सा माहौल है। सुबह से ही घरों में गणगौर के गीतों की गूंज सुनाई देने लग जाती है। 16 दिवसीय गणगौर पूजा होली के दूसरे दिन से शुरू हो गई है। महिलाएं 16 पिंडिया (गौरा का प्रतीक) बनाकर पूजा कर रही हैं।

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