जयपुर। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का समापन मंगलवार सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। व्रती महिलाओं और पुरुषों ने सूर्योदय से पूर्व ही बांस की टोकरी में नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, नींबू, अदरक, सेव, संतरा सहित विभिन्न मौसमी फलों को सजाकर जल में खड़े होकर भगवान भास्कर को अघ्र्य दिया।
श्रद्धालुओं ने लोकगीतों के साथ परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। हालांकि बादल छाए रहने के कारण पूरे दिन ही सूर्य नारायण के दर्शन नहीं हुए। मुख्य आयोजन गलताजी तीर्थ में हुआ। गलता तीर्थ पर बिहार समाज संगठन, राजस्थान मैथिल परिषद एवं मैथिली महिला मंच के संयुक्त तत्वावधान में पूर्वांचल और मिथिलांचल के हजारों श्रद्धालुओं ने सूर्य भगवान को अघ्र्य अर्पित किया।
यहां मिनी बिहार का सा दृश्य साकार हो रहा था। फूलों, केले के पत्तों और दीपों से सजे और रोशनी से सजे घाटों पर बड़ी संख्या में युवाओं ने भी अघ्र्य दिया। इसी के साथ 36 घंटे निर्जल और निराहार रहे व्रतियों का छठ व्रत पूर्ण हुआ। महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरा। युवाओं ने अघ्र्य अर्पित करने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल की।

