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सवारी बनकर बैग से नकदी उड़ाने वाली गुजराती गैंग का पर्दाफाश, 3 महिलाओं सहित 5 गिरफ्तार

जयपुर। राजधानी की चित्रकूट थाना पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ई-रिक्शा में यात्रियों को बातों में फंसाकर चोरी करने वाली शातिर ‘गुजराती गैंग’ का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गैंग के दो पुरुषों और तीन महिला सदस्यों सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से चोरी के 30 हजार रुपए और वारदात में प्रयुक्त ई-रिक्शा बरामद किया गया है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

डीसीपी (पश्चिम) हनुमान प्रसाद ने बताया कि परिवादी रोहित कुमार खंडवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 5 फरवरी को वह 1.20 लाख रुपए लेकर वैशाली नगर जा रहा था। धाबास पुलिया के पास ई-रिक्शा में सवार महिलाओं और पुरुषों ने बातों में उलझाकर उसके बैग पर चीरा लगाया और 70 हजार रुपए पार कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित टीम ने चित्रकूट से बैनाड़ रोड और विद्याधर नगर तक करीब 400 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जिसके बाद इस गैंग की पहचान करते हुए​पुलिस ने विरन उर्फ वीरु (30), भारती (37), कान्हा (30), आरती (40) और लता (28) को गिरफ्तार किया है।

ये आरोपी मूल रूप से गुजरात (अहमदाबाद) और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो जयपुर में किराए के मकान लेकर रह रहे थे। आरोपियों ने शहर के अन्य इलाकों में भी कई वारदातें करना स्वीकार किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गैंग के सदस्य बैंकों, ज्वैलरी शॉप और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बाहर नजर रखते थे कि किसके पास नकदी या गहने है। गैंग का एक सदस्य विश्वास जीतकर ई-रिक्शा किराए पर लेता था।

शिकार को ई-रिक्शा में बैठाने के बाद अन्य सदस्य भी सवारी बनकर बैठ जाते थे ताकि ऐसा लगे कि वे एक-दूसरे को नहीं जानते। सफर के दौरान महिला सदस्य शारीरिक स्पर्श या अपनी बातों से यात्री का ध्यान भटकाती थीं और मौका पाकर बैग या जेब पर कट लगाकर माल साफ कर देती थीं। इस सफलता में थानाधिकारी प्रभुसिंह के नेतृत्व में उप निरीक्षक विमलेश कुमार व उनकी टीम की अहम भूमिका रही। जिसमें कांस्टेबल बीरबल का विशेष योगदान रहा।

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