पिछले साल की तुलना में इस साल ट्रेन से रन ओवर होने के हादसों में हुई वृद्धि

जयपुर। नियमों की अवहेलना कर लोग बेधड़क पटरियां पार करते लोग ट्रेन की चपेट में आने से असामयिक काल के ग्रास बन जाते है। पिछले साल रेलवे स्टेशन के जुड़े आउटरों के आस-पास ट्रेन की चपेट में आने से 69 लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस साल बढकर 88 हो गई। अगर 2016 की बात करें तो जीआरपी थाने में मृतकों की संख्या 52 दर्ज हुई थी।

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पिछले साल 69 लोगों की मौत हो थी, इस साल बढ़ा मौत का ग्राफ हुआ 88 
नियमों की अवहेलना कर बेधड़क पटरियां पार करते लोग, सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी
ट्रेन की चपेट में आने से असामयिक काल के ग्रास बन जाते है लोग
दिनेश सैनी

जयपुर। नियमों की अवहेलना कर लोग बेधड़क पटरियां पार करते लोग ट्रेन की चपेट में आने से असामयिक काल के ग्रास बन जाते है। पिछले साल रेलवे स्टेशन के जुड़े आउटरों के आस-पास ट्रेन की चपेट में आने से 69 लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस साल बढकर 88 हो गई। अगर 2016 की बात करें तो जीआरपी थाने में मृतकों की संख्या 52 दर्ज हुई थी।

जानकारी के अनुसार रेलवे प्रशासन ने शहर के बीचों-बीच से गुजर रहीं पटरियों के दोनों ओर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं कर रखे है। कुछ स्थानों पर पटरियों के दोनों ओर दीवारें बनी हुई है, लेकिन वे भी अधिकांश स्थानों से टूटी हुई है। शहर में करीब चालीस किलोमीटर की दूरी में रेल की पटरियां पसरी हुई है।

गौरव टावर और खिरणी फाटक पर सबसे ज्यादा मौत

प्रारिम्भक जांच में सामने आया कि शहर में ट्रेन की चपेट में आने से सबसे अधिक मौत गौरव टावर व खिरणी फाटक के पास हो रही है। गौरव टावर स्थित रेलवे पटरियों के पास दीवार तो बनी है लेकिन जगह-जगह से टूटी हुई है। रेलवे प्रशासन ने हादसों के बावजूद कभी भी इन दीवारों को सुधारने की जहमत नहीं उठाई। इसके अलावा गांधी नगर रेलवे स्टेशन, सांगानेर, दुगापुर्रा, सीतापुरा पुलिया, बाइस गोदाम पुलिया, गोनेर फाटक, जगतपुरा पुलिया, कनकपुरा स्टेशन और जयपुर जक्शन, झोटवाड़ा थाना इलाके में लगातार ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो रही है।

पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ा मौत का ग्राफ

मिले आकड़ों के अनुसार पिछले साल 2017 ट्रेन की चपेट में आने से 69 लोगों की मौत हो हुई थी, इस साल 2018 में मौत का ग्राफ बढकर 88 हो गया है। मरने वालों में सबसे अधिक संख्या युवा वर्ग की है। शॉर्टकट व जल्दबाजी में युवा पटरियां पार करते है और ट्रेन की चपेट में आ जाते है। हालाकि आरपीएफ और जीआपी थाना पुलिस समय-समय पर अभियान चलाकर समझाइस करते है। इन सब के बावजूद चाहे रेलवे स्टेशन हो या अन्य लोग बेधड़क होकर पटरियां पार करते है।

मकर सक्रांति का त्यौहार के आस-पास ज्यादा होते है हादसे

अधिकारियों की माने तो मकर सक्रांति का त्यौहार आने वाला है और शहर में पतंगबाजी परवान पर है। इस दौरान बच्चे कई बार पतंग लूटने के चक्कर में ट्रेन की चपेट में आ जाते है। पिछले साल भी पतंग लूटने के चक्कर में कुछ बच्चों की मौत हो गई थी। हादसों के चलते कई बार परिवारों की खुशियां उजड़ चुकी है।

मौज मस्ती और गपशप का अड्डा बना रेलवे ट्रैक

जानकारी के अनुसार रेलवे ट्रैक को युवाओं ने मौज मस्ती और गपशप का अड्डा बना दिया है। पार्क समझ यहां शाम हुई नहीं कि काफी संख्या में युवा रेल पटरियों पर या उसके बिल्कुल पास में घंटों बैठ टाइम बिताते हैं। ऐसा नजारा महेश नगर फाटक, जगतपुरा फाटक और मालवीय नगर, खातीपुरा, बाइस गोदाम समेत अन्य रेलवे ट्रैक के पास आसानी से देखा जा सकता है। इस दौरान रेलेवे ट्रैक पर कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं फिर भी युवा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है।

रेलवे कर्मचारी इन युवकों को कुछ नहीं कहते, जबकि ये युवक फाटक के दूसरी ओर ही बैठते हैं। इतना ही नहीं जीआरपी वाले भी इस ओर ध्यान नहीं देते।

इनका कहना है

ट्रेन हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। समय-समय पर समझाइस व जागरूकता अभियान चलाया जाता है। लोग नियमों का उल्लघंन कर पटरियां पार करते है और काल का ग्रास बन जाते है। रेलवे स्टेशनों पर पटरी पार करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं रेलवे स्टेशन के जुड़े आउटरों की आस-पास की दीवारों को भी ऊंचा करवा दिया गया है।
सम्पतराज
थानाधिकारी जीआरपी
जयपुर

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