भक्त की आस्था को केवल प्रभु ही समझते है :आचार्य घनश्याम दास

जयपुर। दुगार्पुरा,सिंधी कॉलोनी के प्राचीन हनुमान मंदिर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नंदोत्सव के रूप में मनाया गया। इस मौके पर प्रभु के प्रकट होने पर गोपियां बधाई का सामान लेकर आई और व्यासपीठ भागवत जी पर श्रद्धा पूर्वक चढाया।

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Acharya Ghanshyam Das
Acharya Ghanshyam Das

जयपुर। दुगार्पुरा,सिंधी कॉलोनी के प्राचीन हनुमान मंदिर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नंदोत्सव के रूप में मनाया गया। इस मौके पर प्रभु के प्रकट होने पर गोपियां बधाई का सामान लेकर आई और व्यासपीठ भागवत जी पर श्रद्धा पूर्वक चढाया। इस मौके पर भक्तों ने नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की….यशोदा जायो ललना…जैसे गूंज रहे बधाई गीतों से वातावरण भक्ति और आस्था के रंग में डूब गया। को भक्तों ने जड भरत कथा सहित अन्य प्रसंगों को सुना,जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।

इस मौके पर व्यास पीठ से भागवत कथा सुनाते हुए वैष्णवभूषण आचार्य घनश्याम दास महाराज ने कहा कि भक्त के भाव को और अपने इष्ट के प्रति भक्त की आस्था को केवल प्रभु ही समझ सकते हैं। इसीलिए जीव को अपना दुख किसी के सामने नही बल्कि ईश्वर के सामने प्रकट करना चाहिए। प्रभु पालनहार है जो शरण में आए भक्तों के सारे दुख हर लेते है।

उन्होंने आगे कहा कि आज हम किसी की निंदा अथार्त बुराई करने में ही बहुमूल्य समय व्यतीत कर देते हैं,इस बहुमूल्य समय को किसी की बुराई करने में नहीं बल्कि भगवान की स्तुति में लगाने चाहिए,प्रभु की चर्चा और उनकी कथा सुनने में लगानी चाहिए। जो सच्चे मन से प्रभु की कथा व उनके चरित्रों का सच्चे मन से श्रवण करता है,उन भक्तों को निश्चित रूप से प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। कथा प्रसंग के तहत महाराज ने कहा कि ़प्रभु की हर इच्छा व उनकी लीला को स्वीकार करने वाला ही सच्चा भक्त होता है। नंदोत्सव से पूर्व भक्तों ने बलि वामन अवतार की कथा भी सुनी।

प्रवक्ता कैलाश खंडेलवाल ने बताया कि कथा प्रसंग के तहत गुरूवार को भगवानश्री कृष्ण की बाललीला,माखनचोरी लीला,चीर हरण कालिया नाग मर्दन,गिरिराज पूजन,15 को महारास लीला,कंस वध,गोपी उद्धव संवाद व रूकमणि विवाह व 16 को श्रीकृष्ण सुदामा मिलन,शुकदेव की विदाई व परीक्षित मोक्ष व व्यास पूजन के साथ कथा की पूणार्हुति होगी।

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