जयपुर। इस वर्ष चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। वर्ष का पहला ग्रहण मंगलवार को कंकण सूर्य ग्रहण के रूप में हुआ, जो भारत में दिखाई नहीं देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं रहा।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि इस साल का पहला सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, चिली और अर्जेंटीना के दक्षिणी भागों में दिखाई दिया। भारत में दृश्य नहीं होने से इसका धार्मिक प्रभाव यहां मान्य नहीं माना गया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष का दूसरा ग्रहण 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में लगेगा, जो भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, एशिया, प्रशांत महासागर तथा उत्तर, दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा। यह ग्रहण अपराह्न 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च को सुबह 6:53 बजे से प्रारंभ होकर ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा।
वर्ष का तीसरा ग्रहण 12 अगस्त को खग्रास सूर्य ग्रहण के रूप में होगा, जो ग्रीनलैंड, आइसलैंड, पुर्तगाल, रूस, उत्तरी स्पेन, यूरोप के अधिकांश हिस्सों, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में दिखाई देगा। वहीं वर्ष का चौथा और अंतिम ग्रहण 28 अगस्त को खंडग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में लगेगा, जो अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि सूर्य और चंद्र ग्रहण खगोलीय घटनाएं हैं। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन तब होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। वहीं सूर्य ग्रहण अमावस्या को तब होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरते हुए पृथ्वी पर अपनी छाया डालता है।
ज्योतिषाचार्य शर्मा ने बताया हि यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से प्रभावी रहा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं रहा। इसके ठीक पंद्रह दिन बाद 3 मार्च को धुलंडी के दिन चंद्रग्रहण शाम 6:26 से 6:46 बजे के बीच दिखाई देगा। कम समय में दो ग्रहण लगना ज्योतिष दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
ऐसे योग के दौरान प्राकृतिक आपदाएं, भूचाल, बाढ़, युद्ध जैसे हालात, बड़े नेताओं से जुड़ी दुखद खबरें या शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। पं. पारीक के अनुसार ग्रहण काल आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ समय होता है। इसमें ईश्वर आराधना से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

