विदेशों में जगमगाएंगे बीस लाख मिट्टी गोबर के दीपक

जयपुर। दीपावली का त्यौहार आते ही इन दिनों जयपुर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने हुनर से चीन को चुनौती देना शुरू कर दिया है। इन महिलाओं ने विदेश में बसे भारतीयों के घर -आंगन को दीपावली पर रोशन करने के लिए वैदिक दीपक बनाना शुरू कर दिया है। हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की महिला काली मिट्टी ,गोबर व प्राकृतिक गोद से वैदिक दीपक बना रही है। इन महिलाओं द्वारा बनाए गए वैदिक बीस लाख दीपक अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में भेजे जाएंगे।

हैनिमैन चौरिटेबल मिशन सोसाइटी की सचिव मोनिका गुप्ता ने बताया कि राज्य में 3 हजार 300 गोशालाओं में 2 करोड़ गाय है। पांच सालों से सोसाइटी की महिलाएं इसी तरह अनेक रचनात्मक कर रही हैं। इस बार दीपावली से 10 दिन पूर्व पिंजरापोल गौशाला के साथ ही शहर के अन्य कई महत्वपूर्ण स्थान में गोबर से बनी हुई दीपक तथा कृतियों का बाजार लगाया जाएगा। रोज एक महिला 800 दीपक बनाकर 1000- 1200 रु. प्रतिदिन कमा रही है।

उन्होंने बताया कि वैदिक दीपक में गाय का गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, में बसे घी, जटामासी, काली मिट्टी का मिश्रण तैयार कर उसमें ग्वार गम मिला कर वैदिक दीपक बनाया जा रहा है। दीपक बनाने के बाद उन्हें सुखने के लिए रखा जाता है। जिसके बाद उन पर रंग -बिरंगे कलर किया जाता है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हर दिन 10 हजार दीपक बना रही हैं। पिछले दो महीने से यह कार्य किया जा रहा है। इसका सबसे राज्य बड़ा कार्य टोंक रोड, सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में हो रहा है।

एक छोटी सी मशीन से बनाया जा रहा है वैदिक दीपक

एक छोटी सी मशीन की सहायता से समुह की महिलाएं वैदिक दीपक बनाने का कार्य कर रहीं है। गोबर मिट्टी के मिश्रण को तैयार करने के बाद हाथ से महिलाएं छोटे-छोटे गोले बना कर मशीन में डाल कर उसे हाथ से दबाती है जिसके बाद दीपक अपनी अलग-अलग आकृति ले लेता है।इस दीपकों को पान ,गोल जैसी आकृति दी जाती है। बताया जाता है कि इन दीपक में जब बाती लगा कर जलाया जाता है तो ये और दीपकों की तरह काले नहीं पड़ते और इनमें तेल भी कम मात्रा में लगता है।

इन जगहों पर लगाई जाएंगी प्रदर्शनी

राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटका, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में इसकी विशेष रूप से एग्जीबिशन में हिस्सा लेकर इन दीपकों के लिए प्रचार प्रसार किया जाएगा। इससे इन महिलाओं को दीपक के लिए बाजार मिल सके। इसके साथ ही अमेरिका, यूरोप में भी एक-एक खेप भेजी जाएगी। इससे वहां भी हिंदुस्तानियों के घर इन दीपकों से रोशन हो सकें।

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