एलेक्टा ने भारत में कैंसर रोगियों के लिए एडेप्टिव रेडिएशन थेरेपी लाने की अग्रणी पहल की

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Elekta pioneers bringing Adaptive Radiation Therapy to cancer patients in India
Elekta pioneers bringing Adaptive Radiation Therapy to cancer patients in India

जयपुर। भारत में हर वर्ष 1.4 मिलियन से अधिक नए कैंसर के मामले सामने आते हैं , जिनमें से एक बड़ा हिस्सा उन्नत अवस्था के कैंसर का होता है। फिर भी, अत्याधुनिक रेडिएशन थेरेपी – जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए उच्च-तीव्रता वाली एक्स-रे का उपयोग करती है— की सभी को समान रूप से उपलब्धता संभव नहीं हो पाई है, खासकर महानगरीय क्षेत्रों के बाहर पड़ने वाले इलाकों में। एलेक्टा, जो प्रिसीजन रेडिएशन थेरेपी के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी कंपनी है, इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयासरत है। कंपनी ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों को एडेप्टिव रेडिएशन थेरेपी (एआरटी) में प्रशिक्षित कर रही है, ताकि कैंसर रोगियों को अधिक सटीक और प्रभावी इलाज मिल सके।

एडेप्टिव रेडिएशन थेरेपी (एआरटी) एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चिकित्सक रोगी के उपचार के दौरान प्रतिदिन ली गई उच्च-गुणवत्ता वाली इमेजिंग के आधार पर उपचार योजना में आवश्यक परिवर्तन कर सकते हैं। यह अनुकूलन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ट्यूमर को सटीक रूप से निशाना बनाने में मदद करता है—भले ही उसका आकार, आकृति या स्थान आंतरिक शारीरिक परिवर्तनों (जैसे कुछ दिनों के दौरान मूत्राशय या आँतें भरी होना और अन्य दिनों में खाली होना) के कारण बदला हुआ नजर आए। इस तकनीक से ट्यूमर को और अधिक सटीक रूप से लक्ष्य बनाया जा सकता है, साथ ही आसपास के संवेदनशील अंगों को दी जाने वाली विकिरण की मात्रा घटाई जा सकती है। ऐसा होने से दुष्प्रभावों और विषाक्तता में कमी आती है और रोगी का उपचार सुरक्षित एवं प्रभावी होता है।

एआरटी की क्षमता, उपचार के परिणामों और रोगियों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर भारत जैसे देश में, जहाँ हर वर्ष 14 लाख से अधिक नए कैंसर मामलों का पता चलता है। कुल मामलों में से लगभग 30% सिर और गर्दन के कैंसर होते हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर सबसे आम प्रकार बने हुए हैं।

रोजमर्रा की चिकित्सा में एआरटी का समावेश

जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यशाला और सायंकालीन वैज्ञानिक संगोष्ठी ने भारत की ऑन्कोलॉजी व्यवस्था में एआरटी (एडेप्टिव रेडिएशन थेरेपी) को बढ़ावा देने के लिए एलेक्टा के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण गति प्रदान की। इस कार्यक्रम, एलेक्टा कनेक्ट में विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चाएं और ऑनलाइन एआरटी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन शामिल था।

एलेक्टा इंडिया के उपाध्यक्ष और एलेक्टा के प्रवक्ता शंकर शेषाद्रि ने कहा, “एलेक्टा कनेक्ट के माध्यम से हमारा उद्देश्य भारत में एडेप्टिव रेडिएशन थेरेपी को तेज़ी से क्लिनिकल स्तर पर अपनाना है। हमारा ध्यान विशेष रूप से कैंसर रोग के अधिक बोझ वाले क्षेत्रों में कार्यरत ऑन्कोलॉजिस्ट्स को आवश्यक उपकरण और विशेषज्ञता उपलब्ध कराने पर है, ताकि वे कैंसर रोगियों को सटीक उपचार प्रदान कर सकें। एआरटी अब कोई सपना नहीं रह गई है; यह उन रोगियों के लिए मानक उपचार पद्धति बनती जा रही है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”

कार्यक्रम का एक प्रमुख स्तंभ है हैंड्स-ऑन वर्कशॉप, जिसके माध्यम से उन चिकित्सकों को उन्नत प्रशिक्षण दिया जा रहा है जो कैंसर रोगियों के लिए रेडिएशन उपचार की योजना बनाते हैं। एलेक्टा के मार्केटिंग हेड – इंडिया तथा मार्केटिंग मैनेजर – मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका, करण मेहरोत्रा ने कहा: “एलेक्टा का प्रशिक्षण और तकनीक चिकित्सकों को सक्षम बना रही है कि वे एआरटी उन रोगियों तक पहुँचा सकें जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स और विशेष रूप से तैयार किए गए नवाचारों के माध्यम से हम न केवल कौशल की कमी को दूर कर रहे हैं, बल्कि विश्व-स्तरीय कैंसर देखभाल तक पहुँच भी बढ़ा रहे हैं।”

गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर के प्रोफेसर (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ. रमेश पुरोहित ने कहा, “एडेप्टिव रेडियोथेरेपी हमें प्रतिदिन होने वाले शारीरिक परिवर्तनों के आधार पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में उपचार योजनाओं को संशोधित करने में सक्षम बनाएगी। यह विशेष रूप से सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ ट्यूमर और अंगों की गतिशीलता बनी रहना सामान्य बात होती है। भारत में बढ़ते कैंसर बोझ से निपटने के लिए हमें इस तकनीक को नियमित उपचार पद्धति का हिस्सा बनाना होगा।”

आरएचएल रेनोवा कैंसर सेंटर, जयपुर के सीनियर रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष चोमल ने कहा, “उन्नत अवस्था में निदान किए गए रोगियों के लिए एआरटी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि सटीकता (प्रिसिजन) दुष्प्रभावों को कम कर सकती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकती है। मेरा मानना है कि रोग बहुत बढ़ने जाने से पहले ही स्क्रीनिंग हो जाने की अच्छी व्यवस्था भी बन जाने पर हमें इलाज की सफलता दर बढ़ाने और पूरे देश में सभी रोगियों को अधिक समानता के साथ कैंसर देखभाल उपलब्ध कराने की वास्तविक क्षमता मिल जाएगी।”

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