पाण्डुलिपि लिप्यन्तरण कार्यशाला का उद्घाटन

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Inauguration of Manuscript Transcription Workshop
Inauguration of Manuscript Transcription Workshop

जयपुर। ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन, दिल्लीय राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर तथा विश्व गुरु दीप आश्रम शोध संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 15 दिवसीय पाण्डुलिपि लिप्यन्तरण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का आयोजन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में इस महत्वपूर्ण पहल की सराहना की।

कार्यक्रम समन्वयक कपिल अग्रवाल तथा पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं प्रशिक्षण पद्धति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कार्यशाला में कुल 270 शोधार्थियों ने अपना पंजीयन करवाया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण, संपादन और लिप्यन्तरण के क्षेत्र में नये शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। आयोजकों ने इसे भारतीय संस्कृति के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि रहे राजस्थान भाजपा के प्रदेषाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पाण्डुलिपियों का संरक्षण भारतीय सभ्यता के अमूल्य ज्ञान को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं को प्राचीन ग्रंथों के लिप्यन्तरण में आगे आने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र की राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की मौलिक सिद्धान्त विभाग की विभागाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि प्रो. निशा गुप्ता ने पाण्डुलिपि लिप्यन्तरण की विधियों और महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वैद्य गोपीनाथ पारीक ने की, जिन्होंने प्रतिभागियों को इस कार्यशाला का भरपूर लाभ उठाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम समन्वयक कपिल अग्रवाल तथा पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं प्रशिक्षण पद्धति पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र में अनेक विद्वान, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे, जिन्होंने पाण्डुलिपि लिप्यन्तरण के व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर प्राप्त किया।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि इस कार्यशाला में कुल 270 शोधार्थियों ने अपना पंजीयन करवाया । संचालन करते हुए डॉ. रघुवीर प्रसाद शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि कार्यशाला के 15 दिनों में 8 भिन्न भिन्न विषयों की प्राचीन पाण्डुलिपियों का लिप्यन्तरण, सम्पादन तथा प्रकाशन कार्य किया जाएगा।

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