जयपुर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर एवं आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंचकर्म शिक्षकों के लिए छह दिवसीय सीएमई कार्यक्रम का आयोजन एनआईए जयपुर में किया गया।
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पंचकर्म चिकित्सा का बहुत महत्व है इसके द्वारा संस्थान में जटिल से जटिल रोगों का उपचार हो रहा है। यह सीएमई कार्यक्रम पंचकर्म शिक्षकों की शैक्षणिक नींव को और मजबूत करेगा तथा आयुर्वेद शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गोपेश मंगल ने बताया कि देशभर से आए 30 पंचकर्म शिक्षकों को पंचकर्म के मूल सिद्धांतों, आभ्यंतर स्नेहन, बाह्य स्नेहन, स्वेदन कर्म, विरेचन, वमन, बस्तिकर्म, रक्त मोक्षण, उत्तर बस्ति और नस्य कर्म जैसे प्रमुख विषयों के साथ-साथ संसरजन क्रम, फिजियोथैरेपी एवं क्रियाकल्प जैसे महतवपूर्णा पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
सीएमई कार्यक्रम में व्याख्यानों, संवादात्मक सत्रों तथा प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से पंचकर्म विषय में प्रशिक्षण, ज्ञानवर्धन तथा शिक्षण कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. अनुप ठाकुर, प्रो. अरुण गुप्ता,प्रो. गोपेश मंगल डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, डॉ. पुलक कांतिकार, डॉ. प्रवीण बी. एस., प्रो. गुलाब पमनानी, प्रो. संतोष कुमार भट्टेड, प्रो. आशीष मेहता, डॉ. अश्विनी कुमार एम., प्रो. सचिन शांतिलाल चंदलिया और प्रो. आनंदरामन शर्मा के साथ देशभर के पंचकर्म विशेषज्ञों ने जानकारी दी।