1000 महिलाओं को मिला रोजगार: होलिका दहन के लिए गोबर की लकड़ी बना रही नई पहचान

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1000 women got employment
1000 women got employment

जयपुर। अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद द्वारा पिछले 10 वर्षों से हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी के सहयोग से राजस्थान में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गाय के गोबर की लकड़ी (पर्यावरण के अनुकूल गाय के गोबर के लट्ठे) निर्माण की एक व्यापक पर्यावरणीय मुहिम संचालित की जा रही है।

इस प्रयास के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। विशेषकर जयपुर शहर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में गोबर की लकड़ी से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस बदलाव देखने को मिल रहा है।

5000 पेड़ों को कटने से बचाने का संकल्प

अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष होलिका दहन के अवसर पर राजस्थान के लगभग 5000 स्थानों पर गोबर की लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है। वही इस पहल के माध्यम से इस वर्ष लगभग 5000 पेड़ों को कटने से बचाया गया है/बचाया जाएगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का सशक्त मॉडल

हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की सक्रिय कार्यकर्ता मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में यह अभियान गंभीरता से संचालित किया जा रहा है। मोनिका गुप्ता ने बताया कि स्वयं सहायता समूह, गौशालाएं और गाय का गोबर—इन तीनों को जोड़कर हम राज्य के विकास एवं स्वरोजगार सृजन की दिशा में एक अमूल्य कार्य कर रहे हैं।

वर्तमान में इस अभियान से लगभग 1000 महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। यदि व्यापक स्तर पर मार्केटिंग एवं प्रचार-प्रसार को और गति दी जाए, तो भविष्य में 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करने की क्षमता यह मॉडल रखता है।

राज्य से बाहर भी बढ़ी मांग 20 ट्रक लकड़ी का प्रेषण

इस वर्ष लगभग 20 ट्रक गोबर की लकड़ी गुजरात एवं तमिलनाडु राज्यों को भेजे गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान में निर्मित यह पर्यावरण हितैषी उत्पाद अब राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति प्राप्त कर रहा है।

सरकारी समर्थन और मान्यता

पिछले वर्षों में राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं विभिन्न सरकारी संगठनों द्वारा भी इस पहल को अपनाया गया है। इस वर्ष गोपालन विभाग द्वारा भी गोबर की लकड़ी के प्रचार-प्रसार पर बल दिया गया है, जो इस अभियान की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है।

अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद एवं हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी का लक्ष्य है कि इस हरित मुहिम को राज्यव्यापी अभियान के रूप में और अधिक सशक्त किया जाए,ताकि— प्रत्येक जिले में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित हों

प्रत्येक होलिका दहन एवं धार्मिक आयोजन में गोबर की लकड़ी अनिवार्य रूप से उपयोग हो । पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप मिले गाय के गोबर की लकड़ी केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर राजस्थान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

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