जयपुर। 1008 कुण्डीय महायज्ञ की पावन पूर्णाहुति के पश्चात जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी एवं आचार्य रामचरणदास महाराज चित्रकूट के लिए प्रस्थान कर गए। प्रस्थान से पूर्व प्रातःकाल महाराज ने “नमो राघवाय” से जुड़े समस्त स्वयंसेवकों एवं उनके परिजनों से आत्मीय भेंट की।
गुरुदेव ने इन समर्पित स्वयंसेवकों को “धर्मयोद्धा” की संज्ञा देते हुए उनके सेवा-भाव, अनुशासन एवं समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा सभी को उज्ज्वल भविष्य, धर्ममय जीवन एवं राष्ट्रसेवा के मार्ग पर सतत अग्रसर रहने का आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर जब गुरुदेव से जयपुर में आगामी किसी धर्मकार्य के संबंध में प्रश्न किया गया, तो उन्होंने सहज भाव से कहा कि “जब हरि बुलाएँगे, तब शीघ्र ही पुनः जयपुर की पुण्यभूमि पर अगला धर्मकार्य संपन्न होगा।” गुरुदेव के इन प्रेरणादायी शब्दों से उपस्थित श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं आयोजन से जुड़े सभी जनों के हृदय में नई ऊर्जा, विश्वास और आध्यात्मिक उत्साह का संचार हुआ।




















