युवाओं की रचनात्मकता के साथ 12वें जयरंगम की शुरुआत

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जयपुर। थ्री एम डॉट बैंड थिएटर फैमिली सोसाइटी की ओर से कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान और जवाहर कला केन्द्र, जयपुर के सहयोग से आयोजित जयपुर रंग महोत्सव (जयरंगम-2023) की रविवार को शुरुआत हुई। पहले दिन युवाओं की रचनात्मकता के रंगों से जयरंगम रंगा दिखाई दिया। पहले दिन तीन नाटकों का मंचन किया गया, दर्शकों की इन्हें खूब सराहना मिली।

‘हिअरिंग फिंगर्स’ में जहां मनन कथूरिया ने अपने जीवन की घटना को नाट्य रूपांतरित कर प्रयोगात्मक रूप से मंचित किया वहीं ‘संक्रमण’ में अरु व्यास के निर्देशन में पिता और पुत्र के बीच रिश्तों को दर्शाया गया। ‘मैं जो करती वो क्यों करती’ एक म्यूजिकल थिएटर परफॅर्मेंस रही जिसमें महिला लोक कलाकारों की कहानी को मनोरंजक तरीके से दर्शाया गया। 12वां जयरंगम प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर को समर्पित है। सुकृति दीर्घा में चेल्सी पाठक के क्यूरेशन में हबीब तनवीर पर आधारित प्रदर्शनी लगायी गयी है, इसमें तस्वीरों और प्रोप्स के जरिए उनके सफर को दर्शाया गया है।

कभी सुनी है फिंगर्स की आवाज

युवा रंगकर्मियों को पहचान देने के लिए जयरंगम की ओर से स्पॉटलाइट को आकार दिया गया है। इसी के अंतर्गत कृष्णायन में मनन कथूरिया के प्रयोगात्मक नाटक ‘हिअरिंग द फिंगर्स’ के साथ जयरंगम की शुरुआत हुई। आधुनिक दौर में जहां लोग अपने मन की बात नहीं सुनते वहीं मनन ने एक मूक-बधिर कलाकार जो अंगुलियों के इशारों से बात करता है उसे समझने के बाद और नाटक के जरिए सभी को सुनाने का प्रयास किया। कृष्णायन में छाए अंधेरे के बीच धीमे-धीमे संगीत की मिठास कानों में घुलती है। लाइट पड़ती है एक चित्रकार पर जो अपने विचारों को कागज़ पर उकेरने में व्यस्त है। इसी बीच दर्शकों के बीच से मनन उठते है और दर्शकों से संवाद करते हुए अपनी फिल्म की कहानी ढूंढने की जद्दोजहद में मशगूल हो जाते है। पेंटिंग्स को देख मनन चित्रकार से बात करने लगता है।

चित्रकार उसे इशारों से अपनी बात समझाने लगता है। चित्रकार मनन को अभिनय करने के अपने सपने के बारे में बताता है और कुछ अभिनेताओं की एक्टिंग भी करके दिखाता है। चित्रकार की रचनात्मकता और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर मनन उस पर फिल्म बनाने की बात कहता है। इसके बाद मंच पर एक प्रोजेक्टर लगता है जो दिखाता है चित्रकार अमित वर्धन पर फिल्माई एक लघु फिल्म जिसमें उनके संघर्ष को दिखाया गया। यह नाटक कोरोना काल के बाद मनन और अमित वर्धन की मुलाकात का जीवंत नाट्य रूपांतरण है।

अपनी वार्ता के दौरान अमित वर्धन ने मनन के सामने अभिनय की बात कही थी जिस पर पहले मनन ने लघु फिल्म बनायी और इस फिल्म को नाटक का हिस्सा बनाकर प्रयोगात्मक तरीके से मंचित किया। नाटक में समीर ने स्टेज डिजाइन और कुणाल ने प्रकाश संयोजन संभाला। निर्देशक मनन ने और चार साल की उम्र से पेंटिंग्स कर रहे अमित वर्धन ने अपना किरदार खुद निभाया।  

ना हो जाए रिश्तों में संक्रमण

रंगायन में निर्देशक अरु व्यास के निर्देशन में खेला गया नाटक ‘संक्रमण’ दर्शकों के दिलों को छू गया। यह सिर्फ पटकथा पर मंचित नाटक नहीं है, दो पीढ़ीयों के बीच मौजूद उम्र के अंतराल का सशक्त चित्रण रहा जिसके प्रभाव से अमूमन हर मध्यमवर्गीय परिवार में पिता और पुत्र के बीच बात बनती दिखाई नहीं देती है।  नाटक का सेट घर के हॉल में ले जाता है। पारिवारिक जिम्मेदारियों में घिरा रिटायर्ड पिता जो मेहनत से बनाए घर की हर चीज को संजोता रहता है। वह अपने बेटे की नजरअंदाजगी से उक्ता गया है। वृद्ध पिता अपने जीवन संघर्ष और बीती यादों को पत्नी सरला से साझा करता है। दोनों के बीच संवाद दर्शकों को खूब गुदगुदाते हैं। जब बिट्टू मंच पर आता है तो अपने नज़रिये को ठीक ठहराते हुए दलीले देता है कि किस तरह पिता आज के दौर के हिसाब से नहीं जीते है।

बिट्टू की बातें भी दर्शकों को हंसाती है। यकायक रंगायन में सन्नाटा छा जाता है जब बाथरूम में टंकी ठीक करते समय गिरने वाले मुखिया की ऑपरेशन के दौरान मृत्यु हो जाती है। ‘डॉक्टर ने कहा उनका दिल कमजोर शायद था, शायद उन्हें महंगाई मार गयी, रिटायरमेंट के बाद जिन्होंने आरामदायक जिंदगी जीने की सोची थी वह अपने खानपान तक में कटौती करने लगे थे।’ सरला के यह संवाद पिता के हर चीज संभालने की उस आदत के पीछे की वजह बताती है। अंत में बिट्टू भी घर की हर चीज को संभालता दिखाई देता है। पिता की हर बात का उसे मतलब समझ आने लग जाता है। मध्य तक जो नाटक दर्शकों को हंसा रहा होता है अंत में कोई भी शख्स ऐसा ना रहा जिसकी आंखें नम ना हो। नाटक संदेश देता है कि जीवन चक्र में हर संतान को कांटों भरे जिम्मेदारियों के उस तख्त पर बैठना होता है जिस पर बैठा पिता बड़ा सहज सा दिखाई देता है, अच्छा है कि पिता की मौजूदगी में ही यह समझ लिया जाए। वरिष्ठ रंगकर्मी भवानी सिंह चौहान ने पिता, सरला के रूप में स्वाती व्यास और बिट्टू बनकर राजेश बिशनोई ने नाटक में जान डाली। जयंत कच्छवाहा ने प्रकाश व प्रफुल बोराणा ने संगीत संयोजन संभाला।    
लोक सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ साझा की कहानियां

हवा में घुली ठंड के साथ मध्यवर्ती में सुरुचि शर्मा के निर्देशन में नाटक ‘मैं जो करती वो क्यों करती’ का मंचन हुआ। इस प्रयोगात्मक नाटक में मध्यवर्ती का बखूबी मंच की तरह प्रयोग किया गया। सजावट से रोशन मध्यवर्ती रंगा नजर आया लोक संस्कृति के रंग में। कालबेलिया, भेपा-भोपी समेत राजस्थान की सात लोक विधाओं से आने वाली महिला कलाकार इस नाटक की पात्र रहीं। कार्यशाला के बाद संजोए अनुभवों के बाद यह प्रस्तुति आकार ले पाई है। यह सभी अपनी-अपनी कहानियां साझा करती है साथ ही दिखाती है लोक कलाओं के वैभव को जाहिर करने वाली प्रस्तुतियां।

इस प्रस्तुति में दर्शक कभी झूमते तो कभी गंभीरता से इन महिलाओं की कहानियों को सुनते नज़र आए। कला, संस्कृति, पर्यटन व पुरातत्व विभाग की प्रमुख शासन सचिव और महानिदेशक जवाहर कला केन्द्र श्रीमती गायत्री राठौड़, जवाहर कला केन्द्र की अति. महानिदेशक सुश्री प्रियंका जोधावत और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर निदेशक श्री निहाल चंद गोयल समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी व कला प्रेमी मौजूद रहे।

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