जैसलमेर में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरी जी का 66वां जन्मोत्सव

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जैसलमेर। अपने जन्मदिवस के शुभ प्रभात में गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरी जी ने चतुर्विध संघ के साथ किला स्थित ज्ञान भंडार में विराजित श्री जिनदत्त सूरि की प्रभावशाली चादर आदि वस्त्रों के दर्शन किए। तत्पश्चात जैन भवन, जैसलमेर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ 80 से अधिक साधु-साध्वी एवं सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में भव्य वरघोड़े के साथ गच्छाधिपति आचार्य श्री का भावपूर्ण स्वागत किया गया। बालिका मंडल एवं महिला मंडल द्वारा वंदना के साथ गुरुदेव को विधिवत सिंहासन पर विराजमान कराया गया।

जन्मोत्सव की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके पश्चात कोमल जी गुलेचा की मधुर गायिकी से पूरा वातावरण संगीतमय और भक्तिमय हो उठा। छोटे बच्चों से लेकर वृद्ध भक्तों एवं वरिष्ठ साधु-साध्वियों ने गुरुदेव को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दीं और हर्ष व आनंद का भाव व्यक्त किया। बधावणा सभा का संचालन उपाध्याय मनितप्रभसागर ने किया। संचालन के साथ साथ उपाध्याय जी खरतरगच्छाधिपति के व्यक्तित्व की विशेषता व्यवहार, विवेक विद्या वैभव का वर्णन करते हुए बहुत ही रोचक और अनुकरणीय जानकारी दी।

आज की सभा में सर्वप्रथम अध्यक्ष महेन्द्र सिंह भंसाली व मैनेजिंग ट्रस्टी सुभाष बापना ने चादर महोत्सव की आमंत्रण पत्रिका गुरु भगवंतों को समर्पित की। चादर महोत्सव के सोंग का लांचिंग किया गया।इस सोंग को स्वर दिया है।

अध्यक्ष महेन्द्र सिंह भंसाली ने जन्मदिवस पर गुरुदेव का आशीर्वाद चाहते हुए निवेदन किया कि जैसलमेर में ज्ञानभंडार का बहुत सा काम करना है और संग्रहालय बनाने के 1997 के सपने को भी साकार करना है, अतः इस वर्ष जैसलमेर में उपाध्याय जी एवं गणि जी का चातुर्मास प्रदान करने की विनंती की। इस अवसर पर देवीकोट में बालिका परिषद का गठन करने की घोषणा की गई और वर्षा चोपड़ा को अध्यक्ष मनोनीत किया गया।

अंत में गुरुदेव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में भविष्य को सुधारने वाली मां के प्रेम और शिक्षा देने वाले गुरु के उपकारों का स्मरण किया। जन्मदिन पर मिली बधाईओं को सावधान होने, जागरुक होने का लाल सिग्नल और मंजिल तक पहुंचने के लिए हरा सिग्नल बताया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों के चेहरों पर विशेष उल्लास और आनंद की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभसूरीश्वर जी को 13 वर्ष की आयु में माताजी व बहिन के साथ 1973 में कान्ति सागर जी महाराज ने पालीताणा में दीक्षा दी थी।

गणि 1988में, उपाध्याय 2001 में,गणाधीश 29.5.2015 में बनाए गए। आचार्य पदवी 2016 में पालीताणा में हुई। 53 वर्षों के संयम जीवन में आपके वरद हस्त से 260 से अधिक जिन मंदिरों की प्रतिष्ठा एवं 160 से अधिक मुमुक्षु दीक्षित हुए हैं ।

उल्लेखनीय है कि दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव आयोजन आपके मुख्य आचार्यत्व में 6से 8मार्च तक जैसलमेर में आयोजित किया जा रहा है। लगातार मिलते रहे देवी संकेत के फलस्वरूप ,इस आयोजन को करने की प्रेरणा (वर्तमान खरतरगच्छाचार्य) तत्कालीन उपाध्याय श्री मनोज्ञसूरिश्वर जी ने 2017 में दी थी।

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