जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को जयपुर महानगर की 88 बस्तियों में एक साथ विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ। इन सम्मेलनों में सामाजिक समरसता,पारिवारिक संस्कार, पर्यावरण संरक्षण,स्वदेशी और राष्ट्रभाव को सशक्त संदेश दिया गया। औसतन प्रत्येक कार्यक्रम में करीब 2000 से अधिक नागरिकों की सहभागिता रही। जबकि 1000 से अधिक मातृशक्ति ने कलश यात्राएं और 1 हजार 500 से अधिक महिलाओं ने तुलसी यात्राओं में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
सम्मेलनों की शुरुआत विभिन्न क्षेत्रों में भव्य कलश यात्राओं, भगवा रैलियों और प्रभात फेरियों से हुई। पिछले 15 दिनों से घर-घर पीले चावल देकर समाज जागरण किया गया। कार्यक्रमों में प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण, स्वच्छता अभियान और पौधारोपण को विशेष महत्व दिया गया।
मानसरोवर, ब्रह्मपुरी, महारानी फार्म, आमेर, करधनी, मालवीय नगर, झोटवाड़ा, प्रताप नगर, चारदीवारी और सी-स्कीम सहित कई क्षेत्रों में हुए सम्मेलनों में ‘पंच-परिवर्तन’—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक शिष्टाचार—पर केंद्रित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बौद्धिक सत्र हुए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री ने कहा कि हिंदुत्व ही विश्वबंधुत्व की आधारशिला है। समाज की एकता और राष्ट्रीयता को और मजबूत करना होगा। विभिन्न मंचों से वक्ताओं ने कहा कि संगठित समाज ही संस्कृति और पहचान की रक्षा कर सकता है।
सम्मेलनों में गौ-सेवा, पर्यावरण संरक्षण, दहेज मुक्त विवाह करने वाले परिवारों, संयुक्त परिवारों, वीर माताओं, शहीद सैनिकों के परिजनों और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, हनुमान चालीसा पाठ, गायत्री यज्ञ, लोकनृत्य और देशभक्ति प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बनाया।
संत मोहनलाल महाराज ने कहा कि गो, गंगा और गीता सनातन धर्म के तीन स्तंभ हैं। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता ही उन्नति का मार्ग है। आयोजकों के अनुसार महानगर की कुल 291 बस्तियों में चरणबद्ध रूप से विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। 88 बस्तियों में हुए आयोजनों ने जयपुर में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और पर्यावरण चेतना का विराट संदेश दिया।



















