
जयपुर। राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं एवं भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी के नेतृत्व में राजस्थान के घुमंतू समाज के सभी पंच पटेलो की एक बैठक का आयोजन किया गया। जहां राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राइका ने सरकार के घुमंतू समाज के हित में किया जा रहे कार्यों को अव्यवस्थित करार देते हुए उसे व्यवस्थित करने के लिए पन्द्रह दिन का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर पन्द्रह दिन में घुमंतु समाज के हित में किया जा रहे कार्यों को व्यवस्थित कर आसान नहीं बनाया जाता तो प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जाएगा।
भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष अनीष कुमार नाडार ने प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री भजन लाल लाल शर्मा के नेतृत्व में पंचायत राज विभाग,सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग तथा अन्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में घुमंतु समाज के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है,जब घुमंतु अर्ध घुमंतु तथा विमुक्त जाति के लिए अलग से आदेश दिए गए हैं।
अब गांव के बाद शहरों में भी घुमंतू समाज जहां लंबे समय से निवास कर रही है। वहीं पर पट्टे देने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। अनीष कुमार नाडार बताया कि समाज हित में इन संगठनों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को भी शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि यूं तो सरकार की लिस्ट में इससे भी अधिक योजनाएं शामिल हैं। लेकिन अब विभिन्न संगठन सक्रियता के साथ सरकार के कार्यों की समीक्षा कर रही हैं एवं अपनी मांग भी रख रही है। इससे सरकार के काम मजबूती से परिलक्षित होंगे एवं घुमंतू समाज को सदियों की दासता से जल्द ही मुक्ति मिल पाएगी।
भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष अनीष कुमार नाडार बताया कि डीएनटी समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये। जिसकी सिफ़ारिश रेनके आयोग ने भी की है । राजस्थान में इन जातियों की अनुमानित जनसंख्या क़रीब 15 प्रतिशत है।इसलिए 10 प्रतिशत आरक्षण की माँग उचित है।
इन जातियों में अधिकतर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जन जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है लेकिन इनको कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय “आरक्षण के भीतर आरक्षण “ के तहत इन समाजों को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए । पंचायती राज्य संस्थाओं और शहरी निकायों में इनके लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाये । जहाँ पर इनके आवास हैं या बाडा है उसी को नियमित किया जाए । आवासहीनों को शहर में 100 वर्ग गज और गाँवों में 300 वर्ग गज आवास के लिए और 300 वार गज पशुओं के बाड़े के लिए दी जाये ।
शिक्षा के लिए शिक्षा बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा अलग किया जाये और उसमें से इनके लिए आवासीय विद्यालय , कला महाविद्यालय , महा आंगनबाड़ी , हॉस्टल, कौशल कॉलेज आदि खोले जायें । उन्हें “ कहीं भी शिक्षा का प्रावधान किया जाये और उनके बच्चों को “ शिक्षा अधिकार ( तपहीज जव मकनबंजपवद) में प्राइवेट स्कूल में प्रवेश में प्राथमिकता दी जाये और उनकी फ़ीस की सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जाये ।महिलाओं और युवाओं को आधुनिक उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक , कंप्यूटर मैन्यूफ़ैक्चरिंग में ट्रेनिंग देकर रोज़गार दिया जाये क्योंकि इन जातियों में बचपन से ही कला की प्रवति होती है इसलिए इन उद्योगों के लिए वे कुशल कर्मचारी साबित होंगे ।
सभी प्राइवेट उद्योगों को इस समाजों को रोज़गार देने का लक्ष्य दिया जाये ।प्रति वर्ष 1000 विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा के लिए भेजा जाए जिसका पूरा खर्च सरकार वहन करने के लिए अलग मंत्रालय, वित्त निगम और लोन की सुविधा होनी चाहिए ।



















