प्रदर्शनी: महिला चित्रकार शिविर और फ्लावर मेकिंग वर्कशॉप में तैयार चित्रों और कलाकृतियों की प्रदर्शनी आयोजित

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जयपुर। जवाहर कला केंद्र की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के विशेष अवसर पर डॉ. तनुजा सिंह के क्यूरेशन में महिला चित्रकार शिविर और अनुपमा तिवारी के निर्देशन में फ्लावर मेकिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें 15 महिला चित्रकारों और प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान महिलाओं ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर आकार दिया और विभिन्न कलात्मक रूपों में व्यक्त किया।

मंगलवार को इन कलाकृतियों और चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें महिला कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कई सामाजिक और व्यक्तिगत विषयों को उजागर किया। प्रदर्शनी में महिलाओं ने बालिका शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, एकांत सुख, दोस्ती, कालबेलिया नृत्यांगना गुलाबो का संघर्ष, मां-बेटी का जीवन, पावर ऑफ यूनिटी और गृहणी की व्यथा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को कैनवास पर उकेरा।

इस शिविर में अर्चना राज, कृष्णा महावर, शीतल, उज्जवला एम तिवारी, बीना जैन, दिव्या, मणि भारती, सोनल जैन, रूकैया, तस्लीम, रेणु शाही, अन्नपूर्ण शुक्ला, संगीता, मनीषा प्रजापत और ममता ने भाग लिया। वहीं फ्लावर मेकिंग वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने टिशू पेपर, क्राफ्ट पेपर आदि से सजावटी फूल व गुलदस्ते तैयार किए।

इस विशेष मौके पर जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक, श्रीमती अलका मीणा और वरिष्ठ लेखाधिकारी बिंदु भोभरिया ने महिला चित्रकारों को उनके योगदान के लिए सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।

बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने का संदेश देती पेंटिंग

आर्टिस्ट सोनल जैन ने अपनी पेंटिंग के माध्यम से अपनी भावनाओं को उकेरते हुए बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी पेंटिंग के जरिए यह संदेश देना चाहती हैं कि अगर बालिकाओं को सही शिक्षा दी जाए, तो वे वह सब कुछ करने के काबिल हो जाएंगी, जो वे अपनी जिंदगी में पाना चाहती हैं। उनकी आत्मनिर्भरता केवल शिक्षा के माध्यम से ही संभव है।

गृहणी का मल्टीटास्किंग रूप दर्शाती पेंटिंग

आर्टिस्ट तस्लीम सोना ने अपनी पेंटिंग में एक गृहणी के रोजमर्रा के जीवन को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे एक गृहणी ग्रामीण क्षेत्र में रहकर न केवल घर के कामों को संभालती है, बल्कि पालतू जानवरों और पशुओं की देख-रेख और सेवा भी करती है, साथ ही अपने परिवार का पूरा ख्याल भी रखती है। पेंटिंग में यह भी दिखाया गया है कि उसकी कंधे पर रखी चाय की केतली से निकलते धुएं में उसके अपने सपने कहीं खो गए हैं।

महिला को मिलेगा महिला का साथ, तो फिर क्या ही बात

आर्टिस्ट अर्चना ने अपनी पेंटिंग ‘पावर ऑफ यूनिटी’ के माध्यम से यह संदेश दिया है कि महिलाओं को एक-दूसरे का साथ और समर्थन देना चाहिए। उनकी पेंटिंग इस विचार को व्यक्त करती है कि जब महिलाएं एक-दूसरे के साथ खड़ी होती हैं, तो उनकी शक्ति और आत्मविश्वास को कोई भी हरा नहीं सकता। महिलाओं का आपस में सहयोग और समर्थन उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की ओर अग्रसर करता है।

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