जयपुर। राजस्थान के दिवंगत वरिष्ठ कलाकारों की कलाकृतियों के तत्व जब कैनवास से निकल कर अनूठी भाव भंगिमाओं के साथ इठलाए तो लगा जैसे रंगों से संजी कला की दुनिया में किसी ने सांसें डाल दी हों। अवसर था राजस्थान लोक कला अकादमी की ओर से जवाहर कला केंद्र में आयोजित 24वें कला मेले में शुक्रवार शाम प्रदर्शित लाइट एंड साउंड शो का।
देश में संभवत: पहली बार लाइट एंड साउंड शो में चित्र कला कृतियों का एनिमेटेड विजुअल इंस्टॉलेशन प्रदर्शित किया गया जिसमें तकनीक व कला की अद्भुत जुगलबंदी देखने को मिली। वरिष्ठ इंस्टॉलेशन आर्ट एक्सपर्ट युनुस खिमाणी के निर्देशन में हुई प्रस्तुति में प्रदेश के दिवंगत कलाकार भूर सिंह शेखावत, रामगोपाल विजयवर्गीय, कृपाल सिंह शेखावत, गोरधन लाल जोशी, ज्योति स्वरूप जैसे कलाकारों की कलाकृतियां जैसे मुंह से बोल पड़ी। मेला संयोजक डॉ. नाथूलाल वर्मा ने बताया कि युनुस खिमाणी और उनकी टीम ने पिछले दस दिन में गहन तकनीकी प्रबंधन के साथ इस प्रस्तुति को तैयार किया जिसका कला प्रेमियों ने दिल खोलकर स्वागत किया।
मैनें कला को क्यों चुना? इस सवाल का जवाब ढूंढें
कला मेले के दौरान आयोजित चर्चा सत्र ‘एक बातचीत: तुम्हारी कला पर’ में वरिष्ठ कलाकार डॉ. प्रमोद सिंह व डॉ. लोकेश जैन ने कलाकारों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। एक सवाल के जवाब में डॉ. प्रमोद सिंह ने कहा कि कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आपने कला को क्यों चुना। इस सवाल का जवाब मिलने के बाद ही एक प्रेम जागृत होता है और उसी से कोई कलाकार बनता है। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए डॉ. लोकेश जैन ने कहा कि कलाकार का वर्सेटाइल होना अच्छी बात है लेकिन उसे इधर-उधर से विचार कॉपी करके अपना काम नहीं चलाना चाहिए।
कला के माध्यम से आत्म साक्षात्कार की चर्चा पर उन्होंने कहा कि कला से मन का शुद्धिकरण होता है और यह आत्म साक्षात्कार के मार्ग पर लेकर जाता है। चर्चा सत्र में प्रदेश के वरिष्ठ कलाकार श्री विद्यासागर उपाध्याय भी मौजूद रहे। उन्होंने कला के नए विद्यार्थियों व नवोदित कलाकारों को आधुनिक समय के अनुसार अपनी कला को आगे बढ़ाने की नसीहत दी। उनका कहना था कि आज कला किताबी परिभाषा से आगे जा चुकी है इसलिए कलाकार को अपनी आंखें और दिमाग खुला रखते हुए समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इस सत्र में बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे।
कैनवास पर थिरकी कूची, बिखरे रचनात्मकता के रंग
कला मेले के दौरान वरिष्ठ कलाकार पवन कुमावत ने वाटर कलर आर्ट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया जो आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने शिल्पग्राम के राउंड स्टेज पर कलाप्रेमियों के बीच कैनवास पर कुछ इस अंदाज में कूची चलाई कि हर दर्शक वाह वाह कर उठा। इस दौरान बड़ी संख्या में नए कलाकारों की उपस्थिति ने इस डेमोंस्ट्रेशन को कला की एक कक्षा का रूप दे दिया जिसमें हर कलाकार अपने वरिष्ठ से कुछ सीखने की ललक लिए खड़ा था। मेले के दौरान कलाकारों ने सामूहिक रूप से पेंटिंग कर कलाकृति भी बनाई।
कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है
वरिष्ठ कलाकार शैल चोयल ने मेले के दौरान आयोजित व्याख्यान में कला विद्यार्थियों से कहा कि आप धीरे-धीरे ही सही पर लगातार प्रयासरत रहें, इसी से बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि कला कलाकार को आनंद देती है इसलिए कला के साथ खेलो। कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है। संयोजक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि वरिष्ठ कलाकार शैल चोयल को सुनने के लिए नए कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिला।




















