जयपुर। दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान जी मंदिर में भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य पर रविवार को 12 बजे चैत्र नवरात्रि घटस्थापना हुई। जिसमें विधि-विधान से दोपहर में कलश स्थापना की गई। नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि नव संवत्सर-2082 के शुभ अवसर पर दोपहर 12 बजे घटस्थापना की गई।
जिसके पश्चात वाल्मीकि रामायण के पाठ प्रारंभ हुए। मंदिर प्रांगण में शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक 201 आसनों से 9 दिवसीय रामचरित मानस के पाठ का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मंदिर प्रांगण से विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पीत वस्त्रों में कलशयात्रा में शामिल हुई।
महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि इसी के साथ खोले के हनुमान मंदिर की पहाड़ी पर स्थित वैष्णों माता मंदिर में भी घटस्थापना के साथ दुर्गा सप्तमी के पाठ शुरु हुए। जो पूरे दिन तक जारी रहेंगे। इससे पूर्व मां वैष्णों देवी का पंचामृत से स्नान कराकर उन्हे नवीन पोशाक धारण कराई गई।
गायत्री मंदिर
भारतीय नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष्य पर गायत्री माता मंदिर और अन्नपूर्ण माता मंदिर में गायत्री कवच,अन्नपूर्णा स्त्रोत और दुर्गा सप्तमी के पाठ प्रारंभ हुए। माता रानी के समक्ष अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई। जो पूरे नौ दिनों तक जारी रहेंगी। इस शुभ अवसर पर मंदिर प्रांगण को रंग- बिरंगे फूलों और लाइटों से सजाया गया।
वैष्णो मंदिर,राजा पार्क
पंचवटी सर्किल राजापार्क में भी चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर रविवार को विधिवत पूजा-पाठ के साथ सुबह साढ़े 6 बजे घटस्थाना की गई। मंदिर अध्यक्ष राज भाटिया ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर सुबह घटस्थापना के साथ माता रानी को भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं के दर्शन लिए सुबह सवा 8 बजे पट खोल दिए गए। उन्होने बताया कि पूरे नौ दिन तक माता रानी का 7 बार आकर्षण श्रृंगार कर उन्हे नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी।
इसी के साथ हनुमान जी की प्रतिमा का भी विशेष श्रृंगार किया जाएगा। नवरात्रों में मंदिर सुबह साढ़े 6 बजे से दोपहर 12 बजे और शाम साढ़े 5 से रात 10 बजे तक पट खुले रहेंगे। इसी दौरान मंदिर में आरती सुबह साढ़े 6 बजे, और संध्या आरती 7 बजे होगी। इसी पश्चात शयन आरती रात साढ़े 9 बजे की जाएगी। समिति के योगेश खुराना ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के अवसर पर पूरे मंदिर प्रांगण को विशेष रंग-बिरंगे फूलों से और बंदरवाल से सजाया गया है। नवरात्रों के दौरान पूरे नौ दिनों तक माता रानी को हलवा,चना,पूरी का भोग अर्पित किया जाएगा। जो श्रद्धालुओं में वितरित होगा।




















