परशुराम जयंती पर सौभाग्य योग समेत बन रहे हैं कई विशेष संयोग

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जयपुर। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को अक्षय और अमोघ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है। विद्वानों के अनुसार इस दिन इस विशेष शुभ अवसर पर लोग स्वर्ण आभूषणों की खरीदारी करते हैं। इस दिन की खरीदारी का विशेष महत्व माना गया है।

सनातन धर्म में परशुराम भगवान के अवतार दिवस और अक्षय तृतीया का खास महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ख्यातनाम ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल कुमार विद्रोही ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 29 अप्रैल को परशुराम जयंती महोत्सव मनाया जाएगा। यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर परशुराम जी की पूजा की जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर कई प्रकार के मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान परशुराम की पूजा करने से जीवन में व्याप्त सभी प्रकार की परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि एवं शांति आती है।

परशुराम जयंती पर शुभ मुहूर्त एवं योग

वैदिक पंचांग के अनुसार, 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत होगी। वहीं, 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त होगी। इस प्रकार 30 अप्रैल को भी अक्षय तृतीया महापर्व मनाया जाएगा।

पंडित विद्रोही के अनुसार परशुराम जयंती पर शुभ मुहूर्त में सनातन शास्त्रों में निहित है कि भगवान परशुराम का अवतार प्रदोष काल में हुआ था। इसके लिए वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रदोष काल में भगवान परशुराम की पूजा की जाती है। इस साल 29 अप्रैल को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है।

इसके लिए 29 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी। वही अक्षय तृतीया पर दूसरे दिन भी विशेष आयोजन होंगे। इस दौरान सामूहिक विवाह सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भक्ति दो दिन भगवान परशुराम जी की पूजा अर्चना का आयोजन कर सकेंगे। वहीं आयोजन के लिए विशेष तैयारी के साथ ही शोभायात्रा और आरती, हवन-यज्ञ, भंडारा प्रसादी के आयोजन भी इस दिन विशेष रूप से किए जाते हैं।

सौभाग्य योग

ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। परशुराम जयंती पर सौभाग्य योग दोपहर 03 बजकर 54 मिनट तक है। इस योग में भगवान परशुराम की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही भगवान परशुराम की कृपा साधक पर बरसती है।
शोभन योग

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर शोभन योग का निर्माण हो रहा है। शोभन योग शाम 03 बजकर 45 मिनट से है। इस योग में भगवान परशुराम की पूजा करने से हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही साधक पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी।

त्रिपुष्कर योग

पंडित विद्रोही के अनुसार परशुराम जयंती पर त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 42 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस योग में भगवान परशुराम की पूजा करने से सभी कामों में सिद्धि मिलेगी।

– पंचांग के अनुसार इस दिन

सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 42 मिनट पर होगा।

–सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 55 मिनट पर होगा।

— चन्द्रोदय- सुबह 06 बजकर 29 मिनट पर होगा।

–चन्द्रास्त रात 09 बजकर 03 मिनट पर होगा।

— ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 16 मिनट से 04 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

— विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

— गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 54 मिनट से 07 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

— निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

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