विशाल कलश यात्रा के साथ संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ प्रारंभ

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जयपुर। अजय विहार, भूरा पटेल मार्ग वैशाली नगर गांधी पथ वेस्ट में गुरुवार से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। इस मौके पर मांगलिक वस्त्रों में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर और पुरुष भागवत पोथी माथे पर रखकर ओंकारेश्वर महादेव मंदिर, भूरा पटेल मार्ग में दर्शन कर ढोल-नगाड़े के साथ रवाना हुए। कलश यात्रा में भागवत कथा मर्मज्ञ पंडित मुरारी लाल जी महाराज भक्तों को भगवान श्री कृष्ण के जयकारे लगवाते हुए चल रहे थे।

इंद्रदेव के स्वागत के बीच भक्तों ने इस दौरान पुष्प वर्षा की गई। आयोजन से जुड़े भक्त धर्मपाल चौधरी ने बताया कि यह आयोजन सुख शांति, आत्म कल्याण, आध्यात्मिक उन्नति के निमित्त अजय विहार, कान्हा विहार, दीपक वाटिका, मां की कृपा राधा रानी सरकार एवं कालोनी वासियों की ओर से किया जा रहा है। भागवत कथा के धार्मिक कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय पार्षद राधेश्याम बोहरा ने की।

इस मौके पर संयोजक धर्मपाल चौधरी, सरवन चौधरी, नरेंद्र पारीक, राहुल जांगिड़, महेंद्र प्रजापत सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओ की उपस्थित रहीं। इस मौके पर सभी ने भागवत पोथी पूजा की। इसके बाद व्यास पीठ से पं मुरारी लाल शर्मा ने संक्षेप में कहा कि संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एक आध्यात्मिक यात्रा है जो मनुष्य को भगवान के करीब लाती है और उसे जीवन के सच्चे अर्थ से परिचित कराती है।

संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आरंभ कथा के महत्व और महात्म्य को बताते हुए किया गया। महाराज श्री ने बताया कि इस कथा में, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, ज्ञान, और वैराग्य का वर्णन होता है।

यह कथा जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन, कथावाचक कथा का महत्व जानना आवश्यक है। यह कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है, जो मुक्ति का मार्ग दिखाती है और भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह कथा वेद, उपनिषद का सार है और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। महाराज श्री ने बताया कि भागवत कथा सुनने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मनुष्य तृप्त होता है।

भागवत कथा सुनने से मनुष्य भगवान के करीब आता है और मोह-माया से मुक्ति पाता है। यह कथा मृत्यु के भय को भी दूर करती है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना, विशेष रूप से संगीतमय, बहुत ही फलदायी माना जाता है। यह कथा सुनने से न केवल व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।

इस मौके पर भक्तों ने भी भागवत पोथी का पूजन किया और आरती उतारी। इस अवसर पर भागवत कथा का पंडाल श्री राधे और भगवान कृष्ण के जयकारों से गूंजायमान मन हो गया। आयोजकों की ओर से भक्तों को पंडाल में भागवत श्रवण के लिए वॉटरप्रूफ टेंट और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।

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