जयपुर। राजधानी जयपुर में गणेशोत्सव का समापन भावुक माहौल में हुआ। शनिवार को शहरभर में अलग-अलग समूह में भक्तगण पूजा-पंडालों और घरों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लेकर नाचते -गाते हुए तालाबों और जल स्त्रोतों के पास पहुंचे। जिसके बाद जल स्त्रोतों के बाहर गणपति बाबा मोरया के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। जल महल झील, मावठा, सागर, चंदलाई बांध सहित कृत्रिम तालाबों में भी गणपति बाबा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
ढोल- नागाड़ो और आतिबाजी के बीच हुआ मूर्ति विसर्जन
शहरभर से अलग-अलग समूह में बाबा के भक्तगण प्रथम पूज्य की प्रतिमा को लेकर ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजियों करते हुए रवाना हुए। कई जगह तो मराठी पारंपरिक वेशभूषा में भी श्रद्धालु गणेश जी महाराज के भजनों पर नृत्य करते हुए नजर आए। डीजे की धून पर थिरकते हुए श्रद्धालुाओं ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रथम पूज्य को छप्पन भोग अर्पित किए गए। जिसके बाद भक्तों ने उन्हे भावुक विदाई दी।

इन जगहों पर हुआ मूर्ति विसर्जन
अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर गणपति बाबा के जयकारों के साथ आमेर मावठा, कानोता बांध, गोनेर बंधा सहित कई नदी-तालाबों के घाट गूंज उठे। श्रद्धालु सजाई हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली, पिकअप और लोडिंग टेम्पो में झूमते-नाचते प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक लेकर पहुंचे। विसर्जन से पूर्व श्रद्धालुओं ने धूप-दीप से पूजन किया और बप्पा को मोदक का भोग अर्पित किया। इसके बाद आतिशबाजी और बैंड-बाजों की गूंज के बीच प्रतिमाओं की शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गों से निकलकर घाटों तक पहुंची। नम आंखों और आस्था से भरे दिलों के साथ भक्तों ने बप्पा को विदा किया और उनके पुनः आगमन की कामना की।
यहा भी हुआ मूर्ति विसर्जन
बनीपार्क के माधव सिंह सर्किल स्थित माधव विलास में विराजमान गणपति बप्पा की श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पुष्पांजलि अर्पित की। ओमप्रकाश मालवानी ने बताया कि सोसायटी के सभी लोगों ने शाम को सामूहिक आरती की। आरती से पूर्व गणपति की नजर उतार कर गणेश वंदना की गई। भक्तों ने ‘गजानन जी मेरे घर में पधारो…’ जैसे भजनों से गणेश जी को रिझाया।

यहां आयोजन में महाराष्ट्र की मराठा संस्कृति साकार हो रही है। मराठा टोपी से लोगों का स्वागत किया जा रहा है। बनीपार्क स्थित माधव विलास में भी गणपति महोत्सव में शनिवार को कृत्रिम तालाब में गणपति बाबा का जयकारों के साथ विसर्जन किया गया। इससे पूर्व सुबह गायत्री हवन संपन्न हुआ।
ओमप्रकाश मालपानी ने बताया कि गणपति का माधव विलास का राजा के रूप में पूजन किया गया। पूरी सोसायटी के लोगों ने गणपति उत्सव में भाग लिया और प्रतिदिन प्रथम पूज्य की पूजा-अर्चना की।सोसाइटी परिसर में विराजमान की गई इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा और दरबार का सामान मुंबई से ही मंगवाया गया।
कई गणपति पांडालों में वृंदावन से आए कलाकारों ने धार्मिक नाट्य मंचन किया। विभिन्न आवासीय सोसायटियों में विराजमान किए गए गणपति बप्पा का विशेष पूजन किया गया। भक्तों ने उत्साह, उल्लास और उमंग के साथ गणेश के भक्ति भाव से भजन गाए और पूजन किया।




















