जयपुर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), मानद विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग विभाग एवं पंचकर्म विभाग की ओर से आयोजित छह दिवसीय सीएमई का समापन हुआ। यह कार्यक्रम 1 सितंबर से 6 सितंबर तक आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने की।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन आयुष मंत्रालय एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के सहयोग से किया गया। इस सीएमई में देशभर से आयुर्वेद विशेषज्ञ, शिक्षक, चिकित्सक एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पंचकर्म चिकित्सा और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विविध विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और अनुसंधान प्रस्तुत किए।पंचकर्म विभाग की ओर से आयोजित सीएमई में कई रोगों में पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से आमजन के बेहतर स्वास्थ्य के विषय में चर्चा की गई।
पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. गोपेश मंगल ने बताया राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के पंचकर्म विभाग की ओर से आयोजित इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने चिकित्सकों को पंचकर्म प्रक्रियाओं की गहन समझ प्रदान की है। समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार शर्मा ने की।
जिसमें पंचकर्म की परिभाषा, प्रासंगिकता तथा वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंतर्गत बाह्य स्नेह, अभ्यंतर स्नेह, स्वेदन, वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य तथा रक्तमोक्षण जैसी प्रमुख पंचकर्म प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत व्याख्यान, व्यवहारिक प्रदर्शन एवं समूह चर्चा आयोजित की गई।
6 दिवसीय सीएमई में प्रो. यू.एस. निगम, डॉ. जितेन्द्र समल, डॉ. मयंक भटकोटी, डॉ. ज्ञान प्रकाश शर्मा, डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, प्रो. जे.पी. सिंह, डॉ. ऋजु अग्रवाल, डॉ. अभिषेक भट्टाचार्य, प्रो. गोपेश मंगल, डॉ. अनिल भारद्वाज, डॉ. प्रवीन के. मडिकोंडा एवं प्रो. सुमन शर्मा जैसे पंचकर्म विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए। प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से आयोजित सीएमई में महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित रोगों के आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से रोग निदान पर चर्चा की गई।




















