सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025: शिल्प, स्वाद और संस्कृति का अनूठा संगम

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Saras Rajasakhi National Fair – 2025: A unique confluence of crafts, flavors, and culture.
Saras Rajasakhi National Fair – 2025: A unique confluence of crafts, flavors, and culture.

जयपुर। जयपुर के शिल्पग्राम में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) के तत्वावधान में आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 देश की विविध सांस्कृतिक, शिल्प और पारंपरिक विरासत का भव्य मंच बनकर उभर रहा है। मेला देशभर से आए शिल्पकारों की उत्कृष्ट हस्तकलाओं के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए शुद्ध, प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मेले में रविवार को दर्शकों में भारी उत्साह देखने को मिला। रंग-बिरंगे टेक्सटाइल उत्पादों के साथ स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों के स्टॉल्स पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आगंतुकों ने न केवल उत्पादों की सराहना की, बल्कि उनकी पारंपरिक और प्राकृतिक निर्माण प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली।

उत्तराखंड से आए स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों ने खास ध्यान आकर्षित किया। इनमें कैमोमाइल चाय, कच्चा शहद, बुरांश की चाय, हर्बल चाय, सेब, गुड़, घी से बनी पारंपरिक मिठाइयाँ और बाजरा आधारित विशेष चाय शामिल रहीं। ये सभी उत्पाद बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए गए हैं।

सांस्कृतिक संध्या में असम के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बिहू, बैशाली, कार्बी, धमाही और शास्त्रीय सत्रिया नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं राजस्थान की पारंपरिक लोक वाद्य परंपरा ‘भापंग’ वादन ने शाम को विशेष बना दिया।

कुल मिलाकर, सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता को सशक्त करने के साथ-साथ देश की विविध सांस्कृतिक, शिल्प और खाद्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

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