श्रीराम कथा: शुक सम्प्रदाय पीठाधीश रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य श्रीराम कथा का आयोजन

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जयपुर। छोटे दादा गुरुदेव शुक सम्प्रदाय पीठाधीश रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में अजमेर रोड क्वींस कॉलोनी नीलकंठ कॉलोनी स्थित श्री सरस निकुंज की पीठ बरसाना में हो रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन विविध प्रसंगों पर प्रवचन हुए। श्री शुक सम्प्रदाय पीठाधीश अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यास पीठ पर आचार्य डॉ. राजेश्वर ने राम नाम की महिमा, भगवान शिव का अगस्त्य ऋषि से राम कथा का श्रवण, सती मोह, पार्वती जन्म, कामदेव को भस्म करना और शिव-पार्वती विवाह की कथा का श्रवण कराया।

आचार्य डॉ. राजेश्वर ने कहा कि शक्ति, बल, प्रतिष्ठा और सामथ्र्य प्राप्त होने पर कभी भी उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। यदि हम अपनी शक्ति और सामथ्र्य का दुरुपयोग करते हैं तो फिर जीवन से आनंद समाप्त हो जाता है। शिव-सती की कथा का यही संदेश है। शक्ति ने अपने जगत जननी भवानी होने के सामथ्र्य का दुरुपयोग किया इसी कारण शिव रूपी आनंद ने उनका साथ छोड़ दिया।

श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि दूसरे दिन कई संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। श्री सरस परिकर की ओर से सभी का सम्मान किया गया। कथा प्रवचन नौ जनवरी तक प्रतिदिन मध्याह्न 1:30 से शाम 5 बजे तक होंगे। कथा के दौरान अनेक आचार्यों एवं संत-महात्माओं का आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा।

श्रद्धालुओं के लिए जलाए अलाव:

सर्दी बढऩे के कारण कथा स्थल पर बाहर अलाव जलाया गया। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं ने पहले हाथ तपाए बाद में कथा सुनी। श्री सरस निकुंज के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि श्रद्धालुओं को सर्दी से बचाने के सभी व्यवस्था की गई है। दरवाजे और खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाए गए हैं ताकि ठंडी हवा नहीं आए। बैठने की व्यवस्था मोटे कालीन और गद्दों पर की गई है।

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