नींदड में श्रीराम कथा: रामभद्राचार्य महाराज ने बताया हनुमान जी की निष्काम भक्ति का मर्म

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Shri Ram Katha in Neendad
Shri Ram Katha in Neendad

जयपुर। सीकर रोड स्थित नींदड में आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने हनुमान जी की असीम शक्ति, अनुपम भक्ति और निस्वार्थ सेवा भावना का भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने ऋष्यमूक पर्वत प्रसंग सुनाते हुए कहा कि साधु वेश में आए हनुमान जी जब श्रीराम-लक्ष्मण से मिलते हैं तो उनके दुख और तेज से ही उन्हें ईश्वरत्व का अनुभव हो जाता है। वे चरणों में गिर पड़ते हैं, श्रीराम उन्हें गले लगाते हैं और फिर हनुमान जी दोनों को अपनी पीठ पर बिठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। यहीं से मित्रता और माता सीता की खोज का मार्ग प्रशस्त होता है।

महाराज ने कहा कि राजा बलि ने वचन की मर्यादा निभाने के लिए अपनी पीठ दी थी, जबकि हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की प्रसन्नता के लिए अपनी पीठ अर्पित की। यह उनके अटूट समर्पण और निष्काम भक्ति का प्रतीक है। वामन अवतार के प्रसंग में उन्होंने संसार को एक थिएटर की संज्ञा देते हुए कहा कि जैसे मंच पर पर्दा चलता है और निर्देशक पीछे रहता है, वैसे ही जीवन में ईश्वर ही निर्देशक हैं। जिसके पीछे स्वयं ईश्वर हों, उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।

धर्म पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि धर्मरूपी रथ के दो पहिए शौर्य और धैर्य हैं तथा ईश्वर भजन उसका सारथी है। जीवन में संतुलन का संदेश देते हुए महाराज ने कहा कि भोजन सदैव सीमित मात्रा में करना चाहिए, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है, जबकि भजन असीमित होना चाहिए, जिससे लोक और परलोक दोनों सुधरते हैं।

आज होंगे भजन और रामलीला

कार्यक्रम से जुड़े अनिल संत ने बताया कि शुक्रवार को श्रीराम कथा के अवसर पर राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावण सहित अन्य कलाकार भजनों की प्रस्तुति देंगे। भगवान श्रीराम और हनुमान जी से जुड़े दोहे, चौपाइयां और भजन गाए जाएंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव संगठन, दिल्ली के बच्चों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसी दिन लगभग 15 हजार छात्र एक साथ एक लाख 51 हजार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करेंगे।

विशिष्ट जनों ने लिया आशीर्वाद

कथा के दौरान कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जवाहर सिंह मैडम और बालमुकुंद आचार्य ने कथा श्रवण किया। आरती के बाद उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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