मौनी अमावस्या श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी

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Mauni Amavasya
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जयपुर। आध्यात्मिक वातावरण के बीच माघ मास का प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या 18 जनवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के तीर्थराज प्रयाग पहुंचने की संभावना है। जयपुर के श्रद्धालु गलताजी में आस्था की डुबकी लगाएंगे। वहीं कई लोग घर पर ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करेंगे।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि मौनी अमावस्या पर पूर्वाषाढ़ एवं उत्तराषाढ़ नक्षत्र का संयोग रहेगा। साथ ही मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य के एक साथ स्थित होने से चतुर्ग्रहीय योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना गया है। मकर राशि का संबंध मां गंगा के वाहन मगरमच्छ से होने के कारण, इस दिन संगम अथवा गंगा में स्नान करने से देवकृपा प्राप्त होने और चतुर्विध उन्नति के योग बनते हैं। अमावस्या की तिथि 17 जनवरी की रात 11.53 बजे से प्रारंभ हो गई जो 18 जनवरी की रात 1.09 बजे तक रहेगी। इस कारण रविवार को पूरे दिन स्नान-दान का विशेष पुण्ययोग रहेगा।

मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद पीपल वृक्ष का पूजन, तिल के लड्डू, तिल, तिल का तेल, वस्त्र एवं आंवला आदि का दान विशेष पुण्यदायी होता है। इस दिन मौन व्रत रखकर इंद्रियों पर संयम करना चाहिए, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच का हो, उन्हें इस दिन दूध, चावल, खीर, मिश्री और बताशा का दान करना शुभ फलदायी माना गया है।

ज्योतिषाचार्य शर्मा ने बताया कि पद्म पुराण में माघ मास की अमावस्या को अत्यंत श्रेष्ठ कहा गया है। इस दिन मौन व्रत रखकर पवित्र नदी में स्नान करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्नान के समय अपने आराध्य देव का ध्यान करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के छल, कपट और धोखाधड़ी जैसे अनैतिक कार्यों से दूर रहना चाहिए। अमावस्या पर गाय, कुत्ता और कौआ का विशेष महत्व बताया गया है, जिनका संबंध पितरों से माना गया है, अत: उनका अपमान नहीं करना चाहिए। यथा संभव इन्हें भोजन कराना चाहिए। इस दिन तन, मन और वाणी को पवित्र रखते हुए मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन त्यागना श्रेयस्कर माना गया है।

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