गायत्री परिवार का शताब्दी समारोह में जयपुर से जाएंगे श्रद्धालु

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जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार के हरिद्वार के बैरागी द्वीप में होने वाले शताब्दी समारोह में जयपुर से सैंकड़ों गायत्री परिजन रविवार को रवाना होंगे। करीब सौ से अधिक कार्यकर्ता वहां कई दिनों से समयदान कर रहे हैं। रविवार को सैंकड़ों कार्यकर्ता रेल मार्ग और सडक़ मार्ग से रवाना होंगे।

खास बात यह है वहां आयोजन की महत्वपूर्ण व्यवस्था में राजस्थान के ही लोग लगे हुए है। इनमें जय सिंह यादव, गौरी शंकर सैनी, दिलीप पंवार शामिल है। ये सभी राजस्थान के हैं जो वहां स्थायी रूप से व्यवस्था देख रहे हैं। मानसरोवर निवासी जयसिंह यादव शांतिकुंज जोन प्रभारी के दायित्व के साथ जल प्रबंधन का कार्य संभाल रहे हैं। यादव ने बताया कि चालीस हजार श्रद्धालुओं के लिए नहाने-धोने और पीने की पानी बढिय़ा व्यवस्था की गई है। सर्दी का मौसम होने के कारण नहाने के लिए गर्म पानी मिलेगा। यादव राजस्थान में जलदाय विभाग में अभियंता रह चुके हैं।

वहीं श्री माधोपुर के गौरीशंकर सैनी गायत्री परिवार राजस्थान जोन के प्रभारी होने के अलावा संपूर्ण निर्माण का कार्य देख रहे हैं। सैनी खुद इंजीनियर हैं। वीआरएस लेकर लंबे समय से गायत्री परिवार का कार्य देख रहे हैं। गायत्री परिवार राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओम प्रकाश अग्रवाल हरिद्वार में पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं

शताब्दी समारोह का शुभारंभ 18 जनवरी को होगा और 24 जनवरी तक चलेगा। इस शताब्दी आयोजन के अंतर्गत मुख्य कार्यक्रम 21 से 23 जनवरी तक संपन्न होंगे। यह शताब्दी समारोह कल्याण और सौभाग्य की त्रिवेणी के 100 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है। प्रथम, गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में प्रज्वलित अखंड दीपक को 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। द्वितीय, गायत्री परिवार की संस्थापिका एवं संचालिका माता भगवती देवी शर्मा का जन्म शताब्दी वर्ष है। तृतीय, युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की तप-साधना की शुरुआत को भी 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।

इन आयोजनों में देश-विदेश से हजारों साधक, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु भाग लेंगे। आयोजन का केंद्र बिंदु युग-निर्माण, मानवीय मूल्यों का जागरण एवं आध्यात्मिक चेतना का विस्तार रहेगा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रभारी एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या के मार्गदर्शन में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजन स्थल लगभग एक लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है।

कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातः:कालीन सत्र से होगी। पहले दिन विचार-प्रेरक सत्र, मार्गदर्शन उद्बोधन एवं संगठनात्मक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। वरिष्ठ मार्गदर्शक युग-निर्माण की अवधारणा, सामाजिक पुनर्निर्माण तथा व्यक्ति निर्माण पर विस्तार से विचार साझा करेंगे। इसके साथ साधना, जप एवं सामूहिक उपासना के कार्यक्रम भी होंगे।

22 जनवरी को दूसरा दिन विशेष रूप से प्रशिक्षण एवं सहभागिता को समर्पित रहेगा। इस दिन विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं, संवाद सत्र तथा अनुभव-साझाकरण के कार्यक्रम आयोजित होंगे।

23 जनवरी को समापन दिवस पर सामूहिक संकल्प, भावी कार्ययोजना एवं शताब्दी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया जाएगा। प्रेरक उद्बोधनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर बल दिया जाएगा।

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