जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सत्ता, न्याय और डिजिटल भविष्य पर वैश्विक विमर्श

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The Jaipur Literature Festival features global discussions on power, justice, and the digital future.
The Jaipur Literature Festival features global discussions on power, justice, and the digital future.

जयपुर। वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे दिन भी गंभीर चर्चाओं और व्यापक संवाद की श्रृंखला जारी रही। साहित्य, राजनीति, क़ानून और तकनीक से जुड़ी प्रमुख आवाज़ें एक साथ आईं और सत्ता, न्याय, नेतृत्व तथा उन कहानियों पर विचार किया, जो हमारी दुनिया को आकार देती हैं।

कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास के साथ एक बहुप्रतीक्षित सत्र हुआ, जिसमें विभिन्न विषयों पर रोचक बातचीत ने भरे हुए सभागार को बाँधे रखा। दास ने दुख के बारे में बोलते हुए इसे पूरी तरह साँस न ले पाने की स्थिति बताया और कहा कि जब कोई व्यक्ति, जो पहले हमारे बाहर था, हमारे भीतर बसने लगता है, तो उसकी कमी शरीर और मन को कैसे बदल देती है। उन्होंने उस रात की एक घटना भी साझा की, जब उन्होंने एमी पुरस्कार जीता था। हाथ में एमी थामे हुए उन्होंने शिकागो में बर्तन धोने से लेकर मनोरंजन जगत के सबसे बड़े सम्मानों में से एक पाने तक की अपनी यात्रा को याद किया।

प्रसिद्ध उपन्यासकार रिचर्ड फ़्लैनगन ने टिम एडम्स के साथ बातचीत में पर्यावरणीय संकट, राजनीतिक उथल-पुथल और विवादित इतिहासों के दौर में साहित्य की नैतिक जरूरत पर विचार किया। फ्लैनगन ने गवाही देने और कहानी कहने के ज़रिए आत्मसंतोष को चुनौती देने में लेखक की ज़िम्मेदारी पर बात की।

फ्लैनगन की किताब स्मृति, विज्ञान और इतिहास के रचनात्मक मेल के जरिए निजी इतिहास को वैश्विक घटनाओं से जोड़ती है। उन्होंने बताया कि अतीत और उसके चारों ओर बुनी गई कथाएँ व्यक्तिगत जीवन को कैसे आकार देती हैं। फ्लैनगन ने स्मृति की अवधारणा पर भी बात की और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि स्मृति हमेशा गवाही का कार्य नहीं होती, बल्कि कई बार रचना का कार्य होती है।

रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी सत्र में पोलैंड के पूर्व विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने नवतेज सरना के साथ यूरोप की राजनीतिक दिक्कतों का तीखा विश्लेषण किया। चर्चा में यूक्रेन युद्ध, रूस की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ और यूरोपीय एकता व वैश्विक सुरक्षा के भविष्य पर बात हुई।

आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर स्पीकिंग माइ माइंड सत्र में जॉर्जिना गॉडविन के साथ संवाद में शामिल हुए। केविन केली द्वारा प्रस्तुत और भारत में आयरलैंड दूतावास तथा कल्चर आयरलैंड के सहयोग से आयोजित इस सत्र में सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक नेतृत्व और सरकार में निर्णय लेने को आकार देने वाले निजी विश्वासों पर खुलकर चर्चा हुई।

दिन की सबसे महत्वपूर्ण बातचीतों में से एक आइडियाज़ ऑफ जस्टिस रही, जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने वीर सांघवी के साथ संवाद किया। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संवैधानिक नैतिकता, न्यायिक स्वतंत्रता और विविध तथा लोकतांत्रिक समाज में न्याय के बदलते अर्थ पर बात की।

अपनी पुस्तक व्हाय द कॉन्स्टिट्यूशन मैटर्स के संदर्भ में चर्चा करते हुए उन्होंने संवैधानिक लोकतंत्र में न्याय के वास्तविक अर्थ को समझाया। उन्होंने ज़ोर दिया कि न्याय कोई अमूर्त अवधारणा नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही में रचा-बसा एक जीवंत अनुभव है। उन्होंने संविधान को समाज को जोड़ने वाला “कॉमन स्टोन” बताया और बताया कि कैसे अदालतों ने इसके दायरे में गरिमा, स्वतंत्रता और त्वरित न्याय के अधिकार को शामिल किया है।

दिस इज़ फ़ॉर एवरीवन सत्र में इंटरनेट का भविष्य चर्चा के केंद्र में रहा, जिसे एचपीसीएल–मित्तल एनर्जी लिमिटेड ने प्रस्तुत किया। वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कारक सर टिम बर्नर्स-ली ने जॉर्जिना गॉडविन के साथ डिजिटल अधिकारों, विकेंद्रीकरण और वेब को एक सार्वजनिक संपदा के रूप में सुरक्षित रखने की ज़रूरत पर चर्चा की।

चौथे दिन की समाप्ति के साथ ही जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने एक बार फिर विचारों के वैश्विक मंच के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित किया, जहाँ साहित्य, राजनीति, क़ानून और तकनीक एक साथ आकर वर्तमान की पड़ताल करते हैं और अधिक न्यायपूर्ण व समावेशी भविष्य की कल्पना करते हैं।

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