हरिद्वार के बैरागी द्वीप में छाया राजस्थानी कला-संस्कृति का जादू

0
56
The magic of Rajasthani art and culture has cast its spell on Bairagi Island in Haridwar.
The magic of Rajasthani art and culture has cast its spell on Bairagi Island in Haridwar.

जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से हरिद्वार के बैरागी द्वीप में मनाए जा रहे शताब्दी समारोह के अंतर्गत ज्योति कलश यात्रा एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान की कला, संस्कृति और शौर्य परंपरा का विशेष आकर्षण देखने को मिला।

गायत्री परिवार राजस्थान के समन्वयक गौरी शंकर सैनी एवं राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल के नेतृत्व में राजस्थान से सैकड़ों गायत्री परिजन समारोह में शामिल हुए। राजस्थान की झांकी का केंद्र वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का स्वरूप रहा, जो घोड़े पर सवार होकर यात्रा का प्रमुख आकर्षण बना।

पचरंगी पगड़ी धारण किए राजस्थान के पुरुष “जय राणा प्रताप” के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे, वहीं महिलाएं पारंपरिक राजपूती परिधान में राजस्थान की आन-बान-शान को प्रदर्शित करती चल रही थीं। यात्रा के दौरान “श्री गोविंद देव महाराज की जय”, “म्हारो हेलो सुनो रामापीर”, “लखदातार की जय”, “सालासर बालाजी की जय” जैसे धार्मिक जयघोष गूंजते रहे। राजस्थान के आदिवासी अंचलों से आए लोग भी पारंपरिक वेशभूषा में यात्रा का हिस्सा बने।

शताब्दी समारोह के अंतर्गत विविध झांकियों के साथ ज्योति कलश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। भारत, अमेरिका, जापान, कनाडा एवं नेपाल की यात्रा पूर्ण कर कुल 58 कलश यात्राएं गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुंचीं। इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख शैलदीदी, स्वामी हरिचेतनानंद, शताब्दी समारोह के दलनायक डा. चिन्मय पंड्या एवं महिला मंडल की प्रमुख शैफाली पंड्या की उपस्थिति में वैदिक कर्मकांड के साथ पूजन संपन्न हुआ।

शोभायात्रा को दलनायक डा. चिन्मय पंड्या ने झंडी दिखाकर रवाना किया। ज्योति कलश यात्रा के साथ उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी जनजातीय समूहों की भव्य झांकियां निकाली गईं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here