पीटीआई भर्ती-2022 में फर्जी डिग्री मामला:एसओजी ने सत्य साईं यूनिवर्सिटी सहित पांच ठिकानों पर मारे छापे

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जयपुर। शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) भर्ती-2022 में फर्जी डिग्रियों के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने मध्यप्रदेश के भोपाल और सीहोर में बड़ी कार्रवाई की है। एसओजी की टीमों ने बुधवार को श्रीसत्यसाईं यूनिवर्सिटी के कैंपस सहित पांच ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। यह कार्रवाई गुरुवार को भी जारी रही।

एसओजी के अनुसार पीटीआई भर्ती-2022 में चयनित 67 अभ्यर्थियों के पास श्रीसत्यसाईं यूनिवर्सिटी की बीपीएड डिग्री पाई गई है। इनमें से 40 अभ्यर्थियों ने आवेदन के समय किसी अन्य विश्वविद्यालय की डिग्री दर्शाई थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान सत्यसाईं यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की। इन सभी 67 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड जब्त कर जांच की जा रही है।

एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख ने बताया कि फर्जी डिग्री की शिकायतों पर अब तक करीब 300 लोगों के खिलाफ पांच अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सामने आया है कि सत्यसाईं यूनिवर्सिटी की ओर से बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां जारी की गईं। यूनिवर्सिटी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में गंभीर हेराफेरी पाई गई है।

इसी कड़ी में एसओजी ने जयपुर कोर्ट से सर्च वारंट लेकर लगभग 40 अधिकारियों की टीम को मध्यप्रदेश भेजा। स्थानीय पुलिस की सहायता से टीमों ने सीहोर स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस, भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित कपूर हाउस, यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सीए के कार्यालय व निवास तथा गांधीनगर स्थित आरकेडीए परिसर में छापेमारी की। फॉरेंसिक अकाउंटिंग और ऑडिटिंग विशेषज्ञों की मदद से यूनिवर्सिटी के एडमिशन, फीस और परीक्षा से जुड़े डाटा की भी जांच की जा रही है।

एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि कई कॉलेजों ने अधिकृत काउंसलिंग प्रक्रिया के बिना ही बीपीएड कोर्स में प्रवेश दे दिए। कुछ कॉलेजों में बिना मान्यता के कोर्स संचालित किए गए। ग्रेजुएशन में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश दिया गया और कई मामलों में बैक डेट में डिग्रियां जारी की गईं।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई अभ्यर्थी कॉलेज गए बिना ही डिग्री हासिल कर गए। पीटीआई भर्ती में फर्जी डिग्री जारी करने के मामले में राजगढ़ (चूरू) की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी और शिकोहाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता पहले ही रद्द की जा चुकी है। अन्य विश्वविद्यालयों की डिग्रियों की जांच एसओजी द्वारा जारी है।

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