महिला सशक्तिकरण और साहित्य पर चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का हुआ आयोजन

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जयपुर। शिक्षा,समाज और समकालीन मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श को मंच देने वाला जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) अपने सातवें संस्करण के साथ एक बार फिर वैचारिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बना। समापन दिवस का मुख्य आकर्षण रहा सत्र सच में हो रहा महिला सशक्तिकरण या सिर्फ हैशटैग,जिसमें तिलोनिया मॉडल गांव से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता नौरोती देवी,कमला मेघवंशी और डॉ. श्रद्धा आर्य ने जमीनी हकीकत और सोशल मीडिया आधारित सशक्तिकरण के अंतर पर गहन विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि असली सशक्तिकरण आंकड़ों और पोस्ट से नहीं,बल्कि गांवों की महिलाओं के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से मापा जाना चाहिए।

इस अवसर पर हॉलिस्टिक लाइफ कोच राजेश्वरी ने भी जीवन मूल्यों और आत्मनिर्भरता पर उपयोगी लाइफ टिप्स साझा किए। इस अवसर पर सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा के प्रिंसिपल फादर संगीत राज,मुख्य आयोजक सुनील नारनौलिया,क्रेडेंट टीवी की टीम मानसी वर्मा,प्राप्ति, कुबेर भाटी, राज नारनौलिया उपस्थित रहे।

समिट के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा के प्रिंसिपल और सह आयोजक फादर संगीत राज एसजे ने कहा, जयपुर एजुकेशन समिट का उद्देश्य केवल संवाद करना नहीं, बल्कि समाज को सोचने की दिशा देना है। अगला संस्करण और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीण शिक्षा, डिजिटल असमानता और रोजगारपरक शिक्षा जैसे मुद्दों को विशेष फोकस में रखा जाएगा।

समापन दिवस का दूसरा महत्वपूर्ण सत्र रहा “क्या टिक-टॉक के युग में साहित्य अभी भी प्रासंगिक है?” इस सत्र में एएसपी सुनील प्रसाद शर्मा, लेखक मनोज वार्ष्णेय और कवि-लेखक अनुराग वाजपेयी ने साहित्य की भूमिका पर सार्थक संवाद किया। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल दौर में भले ही कंटेंट का स्वरूप बदला हो, लेकिन साहित्य आज भी समाज को सोचने, सवाल उठाने और संवेदनशील बनाने का माध्यम बना हुआ है।

इसके अतिरिक्त विभिन्न विचारोत्तेजक सत्रों में समाज, जीवन और आध्यात्म से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ। “आवाज़ में असर, शब्दों में वज़न” सत्र में डॉ. फिरोज़ खान के साथ बातचीत करते हुए इकराम राजस्थानी, रेशमा खान और नेकी राम आर्य ने संवाद की शक्ति और भाषा की जिम्मेदारी पर विचार रखे।

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