जयपुर। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के निदेशक इन्दजीत सिंह ने जयपुर स्थित विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान का औपचारिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की कार्यप्रणाली तथा पाण्डुलिपि संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन कर उनकी सराहना की।
निरीक्षण के दौरान निदेशक इन्दजीत सिंह ने कहा कि विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान, ज्ञान भारतम् मिशन के क्लस्टर सेंटर के रूप में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा पाण्डुलिपियों के सर्वेक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
निरीक्षण दल में निदेशक के साथ शिशिर पाढ़ी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर आर्काइव निदेशक चन्द्रसेन शेखावत ने पाण्डुलिपि संरक्षण व संवर्धन को और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संस्थान के उपाध्यक्ष एवं समन्वयक महामण्डलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि शोध संस्थान लंबे समय से पाण्डुलिपि संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है तथा ज्ञान भारतम् मिशन से जुड़ने के बाद इस कार्य को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस अवसर पर राजस्थान पाण्डुलिपि समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने राजस्थान में प्रस्तावित पाण्डुलिपि कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें सर्वेक्षण प्रक्रिया, डिजिटलीकरण की रणनीति तथा राज्यभर में संरक्षण नेटवर्क को सशक्त बनाने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
अंत में निदेशक इन्दजीत सिंह ने संस्थान की टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान, ज्ञान भारतम् मिशन के उद्देश्यों को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।




















