ट्यूबरक्लोसिस (टीबी): समय पर पहचान और पूरा इलाज आज पहले से कहीं अधिक जरूरी

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Tuberculosis (TB): Timely diagnosis and complete treatment are more important today than ever before.
Tuberculosis (TB): Timely diagnosis and complete treatment are more important today than ever before.

जयपुर। राजस्थान स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिसंबर 2025 में चलाए गए विशेष ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) स्क्रीनिंग अभियान ने एक गंभीर सच्चाई उजागर की है। केवल एक महीने में प्रदेश भर में 1.7 लाख से अधिक नए टीबी मरीज सामने आए, जिनमें जयपुर के 12416 मामले शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से बड़ी संख्या में लोग ऐसे थे, जिन्हें यह पता ही नहीं था कि वे टीबी से संक्रमित हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे “छिपे हुए टीबी मामले” इस बात का संकेत हैं कि समाज में अभी भी टीबी को लेकर जागरूकता और समय पर जांच की भारी कमी है। डॉ. अंकित बंसल, सीनियर कंसल्टेंट – पल्मोनोलॉजी ने बताया कि “टीबी एक ‘साइलेंट स्प्रेडर’ बीमारी है।

यह सामान्य खांसी या सर्दी जैसी लग सकती है, लेकिन बिना इलाज के यह दूसरों में भी फैलती रहती है। टीबी केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि लिम्फ नोड्स, हड्डियों, दिमाग और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। यह बीमारी हवा के ज़रिए फैलती है, जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है।” टीबी के ऐसे लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें।

डॉ. बंसल ने आगे कहा कि “समय पर जांच से न केवल मरीज सुरक्षित रहता है, बल्कि उसका परिवार और समाज भी सुरक्षित रहता है। आज उपलब्ध रैपिड टेस्ट से टीबी और ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी का जल्दी पता लगाया जा सकता है। टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है, बशर्ते इलाज समय पर शुरू किया जाए और दवाइयों का पूरा कोर्स पूरा किया जाए। बीच में इलाज छोड़ने से बीमारी और भी खतरनाक रूप ले सकती है।

राजस्थान में सामने आए हालिया आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि टीबी का उन्मूलन केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की ज़िम्मेदारी है। समय पर जांच, सही इलाज और जन-जागरूकता से टीबी को रोका और पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

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