जयपुर। गत 12 दिसंबर को अस्त हुआ शुक्र एक फरवरी को सुबह उदय होगा। ऐसे में मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ होंगे। शुक्र उदय से तीन दिन बाद तक बालत्व दोष माना जाता है। इन दिनों में भी कोई शुभ कार्य वर्जित रहता है। इस कारण पहला शुभ सावा चार फरवरी को होगा। उधर, विवाह स्थलों, बैंक्वेट हॉल, सामुदायिक केन्द्रों और होटलों में विवाह पूर्व की रस्मों का दौर शुरू हो गया है। शनिवार को कई स्थानों पर तिलक दस्तूर, सगाई, भात, महिला संगीत जैसे रस्में निभाई गई।
फरवरी माह में 4, 5, 10, 20, 21, 24, 25, 26 तारीख को भी शहनाई बजेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरू एवं शुक्र तारा उदय होने पर ही विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि विवाह के लिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि वार, नक्षत्र, योग और लग्न का भी विशेष महत्व होता है। अत: किसी भी तिथि का चयन करते समय वर-वधू की कुंडली मिलान एवं व्यक्तिगत ग्रह-दशाओं का विचार करना अत्यंत आवश्यक है। इससे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।
आधुनिक समय में लोग सुविधानुसार तिथि चुन लेते हैं, किंतु यदि विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव जीवन भर बना रहता है। मार्च माह में 9, 10, 11, 12 चार दिन विवाह के मांगलिक मुहूर्त रहेंगे। 17 मई से 15 जून तक (पुरुषोत्तम) मलमास रहेगा। 15 जुलाई से 09 अगस्त तक गुरु अस्त रहेगा। 12 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त रहेगा।




















