जयपुर। हिंदू पंचांग का अंतिम महीना फाल्गुन मास सोमवार से आरंभ हो गया। फाल्गुन मास में ग्रामीण अंचल में ढप-चंग की थाप पर होली की धमाल सुनाई देगी। मंदिरों में फागोत्सव के आयोजन होंगे। बरसाना की लठमार होली और फूलों की होली खेली जाएगी। इसी माह महाशिवरात्रि, आमलकी एकादशी एवं होली जैसे प्रमुख पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे।
यह मास भगवान शिव-माता पार्वती तथा भगवान श्रीकृष्ण की उपासना, आराधना एवं दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्य पं. सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि फाल्गुन मास में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत-उपवास एवं पुण्य कर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष में 8 फरवरी को भानु सप्तमी, 12 फरवरी को महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती, 13 फरवरी को विजया एकादशी, 14 फरवरी को प्रदोष व्रत तथा 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा।
वहीं फाल्गुन शुक्ल पक्ष में 19 फरवरी को फुलेरा दूज पर विवाह का अबूझ मुहूर्त रहेगा। 27 फरवरी को आमलकी एकादशी के अवसर पर बाबा श्याम का मेला भरेगा। फाल्गुन मास का समापन 3 मार्च को होली पर्व के साथ होगा।




















