जयपुर। इस्लामी माह शाबान की शुरुआत हो चुकी है। शाबान की 15वीं तारीख की रात यानी मंगलवार 3 फरवरी को शब-ए-बरात अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जाएगी। शब-ए-बरात को लेकर सोमवार को मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों में साफ-सफाई कराई गई।
कब्रिस्तानों की विशेष सफाई कराई गई है, ताकि लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ सकें। कब्रिस्तानों में अपने पुरखों की मजारों पर पहुंचने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए कब्रिस्तान की कमेटियों ने लाइट का विशेष इंतजाम किया है।
नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट दुरुस्त कर दी है। हजरत मौलाना सूफी सैफुल्लाह कादरी ने बताया कि यह रात सिर्फ रस्म अदायगी की नहीं, बल्कि अपने गुनाहों से तौबा कर के अल्लाह से रिश्ता मजबूत करने की मुकद्दस रात है। अल्लाह तआला ने कुछ रातों को आम रातों से अलग दर्जा अता फरमाया है। उन्हीं मुकद्दस और बरकत वाली रातों में एक अजीम रात है शबे-बराअत, जो रहमत, मगफिरत और निजात की रात कही जाती है।
कादरी ने अपील की कि इस रात गुस्ल कर पाक साफ कपड़े पहन कर खुशबू लगाकर अल्लाह की इबादत में मशगूल हो। दरूद और सलाम की कसरत करें और अपने मरहूमीन के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें। शबे बराअत में नफ्ल नमाजों की बड़ी फजीलत है। इस रात की गई इबादत अल्लाह की बारगाह में खास मकबूल होती है और बंदे की मगफिरत का सबब बनती है।




















