भक्ति भाव से मनाया जैन धर्म के छठें तीर्थंकर भगवान पदमप्रभू का मोक्ष कल्याणक

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The Moksha Kalyanak (liberation day) of Lord Padmaprabhu, the sixth Tirthankara of Jainism, was celebrated with devotion.
The Moksha Kalyanak (liberation day) of Lord Padmaprabhu, the sixth Tirthankara of Jainism, was celebrated with devotion.

जयपुर। जैन धर्म के छठें तीर्थंकर भगवान पदमप्रभू का मोक्ष कल्याणक दिवस गुरुवार को भक्ति भाव से मनाया गया। इस मौके पर राजधानी सहित आसपास के दिगम्बर जैन मंदिरों में मोक्ष का प्रतीक निर्वाण लाडू चढाया गया।

राजस्थान जैन सभा जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि प्रातः पदमप्रभू भगवान के अभिषेक, शांतिधारा के बाद पूजा अर्चना की गई । पूजा के दौरान निर्वाण काण्ड भाषा बोलकर मोक्ष कल्याणक श्लोक का उच्चारण करते हुए मोक्ष का प्रतीक निर्वाण लाडू चढाया गया । आरती के पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।

श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा (बाड़ा) में गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ सान्निध्य में मुख्य आयोजन हुआ। क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष सुधीर जैन व मंत्री हेमन्त सोगाणी के नेतृत्व में प्रातः मूल नायक पद्मप्रभ भगवान की प्रतिमा के विशेष अभिषेक के बाद शांतिधारा की गई। जिसके तत्पश्चात निर्वाण पूजा की जाकर निर्वाण काण्ड भाषा का सामूहिक उच्चारण किया गया। तत्पश्चात जयकारों के साथ 21 किलो का मोक्ष का प्रतीक निर्वाण लाडू चढाया गया । अन्त में भगवान पदमप्रभू की महाआरती की गई।

जिसके तत्पश्चात बैण्ड बाजों के साथ जुलूस के रुप में नाचते गाते श्रद्धालु कस्बें के पद्मप्रभ मंदिर पहुचे । जहां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान पदमप्रभू का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।

प्रातः सवा 10 बजे से जयकारों के बीच भगवान पदमप्रभू की विशाल खड्गासन प्रतिमा के अति भव्य पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया गया । इस मौके पर जल, चन्दन, दुग्ध, दही, घृत, सर्वौषधि, हल्दी, इक्षुरस, अनार, मौसमी, नारियल, सुगन्धित जल, से महामस्तकाभिषेक के बाद पुष्प बरसाए गए। इस दौरान कलशा डालो रे डालो रे नर नारी….., पदमप्रभू भगवान का मस्तकाभिषेक….. भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। तत्पश्चात शांतिधारा का पुण्यार्जन मुनि भक्त दीपक बिलाला ने किया। महाआरती के साथ समापन हुआ।

इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रद्धा भाव से प्रभू के अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना करने से इस भव के साथ अगला भव भी सुधरता है।

गौरतलब है कि 7 फरवरी को जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक, रविवार, 8 फरवरी को जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक तथा आठवें तीर्थंकर भगवान चन्द्र प्रभू का ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस मौके पर दिगम्बर जैन मंदिरों में पूजा अर्चना के विशेष आयोजन होगें।

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