जयपुर। महेश नगर थाना इलाके में अर्जुन नगर फाटक पर निलंबित लेक्चरर के सुसाइड मामले में परिजनों की संविदा पर नौकरी सहित अन्य मांगों पर सहमति बन गई । जिसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया। इस मामले में मृतक के परिजनों के साथ पूर्व मंत्री सुखरा विश्नोई भी धरने में शामिल हुए थे।
धरना समाप्त होते ही मृतक के चचेरे भाई ठकाराम ने बताया कि प्रशासन ने संविदा नौकरी के साथ ही सेवाकाल के सारे परिलाभ और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांगे मान ली है। जिससे परिजनों का आक्रोश शांत हुआ है। धरने पर बैठे मृतक मनोहर लाल के परिजन से डिप्टी रामकिशन विश्नोई ने आपसी समझाईश कर मामला शांत कराया।
मृतक मनोहर लाल ने आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में एसओजी के दो अधिकारियों पर जबरन धमकी देने व पैसे वसूलने का आरोप लगाया था। सुसाइड नोट की जानकारी मिलने के बाद मृतक के परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने से इनकार करते हुए सवाई मानसिंह अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया था।
बताया जा रहा है कि मनोहर के खिलाफ 2021 में बजाज नगर थाना इलाके में रीट परीक्षा में डमी बैठाने के मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। 2022 में उदयपुर के सवीना थाना क्षेत्र में भी डमी कैंडिडेट के प्रयास के आरोप में उसे पकड़ा गया था। वर्ष 2024 में स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में भी उसका नाम सामने आया था।
ये था परिजनों का आरोप
गुरुवार को मृतक के परिजनों ने एसओजी के दो अधिकारियों श्यामसुंदर और मुकेश सोनी पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का आरोप था कि मनोहर को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि किसी भी मामले में किसी के पकड़े जाने पर मनोहर का नाम जबरन जोड़ दिया जाता था। मनोहर ने दोस्तों को भेजे सुसाइड नोट में खुद को निर्दोष बताया था।
मनोहरलाल भादू (35) जालोर जिले के सांचौर निवासी थे। उनके 3 बच्चे हैं, जो पत्नी के साथ गांव में रहते हैं। निलंबन के बाद वह जयपुर महेश नगर में किराए से रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बुधवार शाम उन्होंने अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद सुसाइड नोट की बात सामने आने पर मृतक के परिजन धरने पर बैठ गए और संविता कर्मी और सेवाकाल के सभी लाभ मिलने की मांग पर धरने प्रदर्शन कर बैठ गए।




















