जयपुर। भवानी निकेतन परिसर सीकर रोड में शुक्रवार को 21 फरवरी से 01 मार्च तक आयोजित होने वाले नौ दिवसीय 108 कुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ के लिए संत- महात्माओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति में भूमि पूजन एवं ध्वजारोहण किया गया। यह आयोजन ढेहर के बालाजी स्थित सियारामदास बाबा की बगीची के महंत हरिशंकरदास वेदांती महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है।
इस अवसर पर ब्रह्म पीठाधीश्वर खोजी द्वाराचार्य श्रीराम रतन दास महाराज डाकोर धाम त्रिवेणी धाम, महामंडलेश्वर हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य महाराज, महामंडलेश्वर श्री राम सेवक दास महाराज पापड़ के हनुमान जी, लहाराम द्वाराचार्य, जगतगुरु श्री पीपा पीठाधीश्वर हरिदास महाराज अरनिया धाम, धन्ना पीठाधीश्वर श्री बजरंग देवाचार्य महाराज तमाडिया धाम एवं अन्य कई जगह से पधारे हुए महामंडलेश्वर एवं बनारस अयोध्या काशी से पधारे हुए समस्त संत-महंत उपस्थित रहे।
महायज्ञ के बारे में हरिशंकरदास वेदांती महाराज ने बताया कि अनंत विभूषित श्रीजगतगुरु रामानंदाचार्य महाराज की 725वीं पूर्ति प्राकट्य उत्सव के साथ ही राष्ट्रोत्थान, विश्व कल्याण, गो संवर्द्धन, समृद्ध राजस्थान, भारतीय संस्कृति के संरक्षणार्थ एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए पुनीत भावना को ध्यान में रखकर 21 फरवरी से 1 मार्च तक 108 कुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ का आयोजन भवानी निकेतन शिक्षा समिति परिसर गेट नंबर 6-7 पर संपन्न होने जा रहा है।
वेदांती महाराज ने इस पावन अवसर पर अपने उद्बोधन में कहां कि यज्ञ ही समस्त सृष्टि के उत्पत्ति स्थिति और प्रलय का मूल कारण है। जिस प्रकार शिशु मात्र गर्भ में अपायनी नामक नाड़ी से रसग्रहण करता है और पोषित होता है। उसी प्रकार यज्ञ के द्वारा ही समस्त जीवों का पोषण होता है। यक्ष मानव जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय सनातन संस्कृति में जितने संस्कारों का उल्लेख है उन समस्त संस्कारों में यज्ञ की विशिष्ट भूमिका है।
बिना यज्ञ के कोई भी संस्कार संभव नहीं है। समस्त कामनाओं को पूर्ण करने के लिए यज्ञ साक्षात कल्पवृक्ष माना गया है। आयोजन से जुड़े समाजसेवी चंद्र महेश झालानी ने बताया कि वेदांती महाराज के द्वारा आयोजन और इस महायज्ञ का प्रयोजन धर्म स्थापना, सनातन संस्कृति का संरक्षण, गोवंश का संवर्धन, जीव मात्र का कल्याण, सनातन धर्म के प्रति सनातनियों में ही नहीं अपितु मानव मात्र के हृदय में श्रद्धाभाव एवं अनुराग जागृत हो, हिंदू संस्कृति की रक्षा हो।
श्री राम महायज्ञ का उद्देश्य यज्ञ के द्वारा प्राणी मात्र का कल्याण और वातावरण शुद्ध हो और भारतीयों के लिए यह मंगलकारी हो। इस महायज्ञ में देशभर से साधु-संतों, महात्माओं का भक्तों को सान्निध्य प्राप्त होगा। महायज्ञ में विद्वानों के प्रवचन, भजन सहित अन्य आयोजन भी होंगे। इस महायज्ञ में विद्वानों के सानिध्य में रोजाना भक्तों की ओर से महामंत्रों की ध्वनियों के बीच लाखों आहुतियां दी जाएगी।
श्री राम महायज्ञ के अंतर्गत 21 फरवरी को दोपहर 2:00 बजे से कलश यात्रा का आयोजन किया गया है। यह कलश यात्रा सन एंड मून टावर रिद्धि सिद्धि टावर रोड नंबर 1 से चलकर कलश यात्रा भवानी निकेतन के गेट नंबर 6 से यज्ञ स्थल में प्रवेश करेगी। इसमें होने वाले कार्यक्रमों में 22 फरवरी से 25 फरवरी तक गिरिराजजी उत्तर प्रदेश के महंत भक्तमाल कथा सुनाएंगे एवं 26 एवं 27 फरवरी को श्रीमद् जगतगुरु अग्र मलूक द्वारा आचार्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज द्वारा सत्संग किया जाएगा एवं 28 तारीख को 1008 सुंदरकांड पाठ एवं 11000 हनुमान चालीसा के पाठ श्रीरामजी महाराज के विकास स्वात में संपन्न होगा, इसमें जयपुर के सभी मंडलों द्वारा यह आयोजन किया जाएगा। आयोजन के विश्राम पर 1 मार्च को संत सम्मेलन एवं भंडारा प्रसादी होगी।




















