देव पितृकार्य भौमवती अमावस्या पर पितरों के निमित्त होगा दान पुण्य

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जयपुर। पंचांग के अनुसार मंगलवार को भौमवती अमावस्या हैं। अमावस्या तिथि मंगलवार को आने से इसे भौमवती अमावस्या और भौम अमावस्या कहा जाता हैं । जो पितृ दोष निवारण और तर्पण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई हैं।

पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन पितृ तर्पण, दान और साधना करने से पितृदोष शांत होता हैं और घर-परिवार में सुख,शांति और समृद्धि आती हैं। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 17 फरवरी को मंगलवार को शाम 05:33 बजे तक रहेगी। इस दिन सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के लिए काले तिल,जल और कुश के साथ तर्पण करें। पीपल के पेड़ पर कच्चा दूध,गंगाजल और जल अर्पित करके सात परिक्रमा दें। पीपल वृक्ष में पितृ और भगवान विष्णु का वास माना गया हैं ।

शर्मा ने बताया कि इस दिन गेहूं,गुड़,तांबे के बर्तन या लाल कपड़े का दान करना फलदायी माना गया हैं। पितृ पूजन करने का समय सुबह 11:15 से दोपहर बाद 2:03 बजे तक रहेगा। काला तिल,उड़द,कंबल,जूते और छाता, वस्त्रादि का दान करें । इस दिन खीर,पूड़ी या तिल से बनी वस्तु कौवों को अर्पित करें साथ ही गाय को गुड़ और रोटी खिलाएं। पितृ स्तोत्र और गीता का पाठ करना चाहिए।

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