जयपुर। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से होगी। इसका समापन 3 मार्च को होलिका दहन के साथ होगा। इस दिन ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु सहित सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। इस कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अन्य मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता। इन दिनों नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से बचने के लिए हवन-पूजन, भगवान का स्मरण तथा धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष लाभकारी होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। इस अवधि में भगवान विष्णु, भगवान शिव, हनुमानजी एवं भक्त प्रह्लाद की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक शांति, भय से मुक्ति और ईश्वर की कृपा प्रदान करने वाला माना गया है। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और दान करने से सुख-समृद्धि एवं कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होगा होलिका दहन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका दहन के लिए भद्रा रहित एवं प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि सर्वोत्तम मानी जाती है। यदि ऐसी स्थिति उपलब्ध न हो और भद्रा मध्य रात्रि से पूर्व समाप्त हो जाए तो भद्रा समाप्ति के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।




















