बीस साल से अपनी ही जमीन के लिए लड़ रहे 350 परिवार: कॉलोनी वासियों ने दी प्रशासन को चेतावनी

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350 families have been fighting for their own land for twenty years.
350 families have been fighting for their own land for twenty years.

जयपुर। जयपुर के करधनी थाना इलाके में कालवाड़ रोड स्थित आदर्श विहार विकास समिति के करीब 350 प्लॉट धारक परिवार पिछले दो दशकों से अपनी ही जमीन के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। कॉलोनी वासियों का आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विवादों के चलते उन्हें अब तक राहत नहीं मिल सकी है। इधर कॉलोनी वासियों का कहना है कि वह शीघ्र ही सभी जनप्रतिनिधियों से मिलकर समाधान की मांग करेंगे।

समिति अध्यक्ष रोहिताश मीणा ने बताया कि वर्ष 2002 में 90B प्रक्रिया के बाद कॉलोनी का विकास किया गया। वर्ष 2000 से 2010 के बीच कई लोगों ने यहां प्लॉट खरीदकर मकान बनाए और तब से लगातार रह रहे हैं। लेकिन जमीन के दाम बढ़ने के बाद काश्तकारों ने दावा कर दिया कि उन्होंने जमीन बेची ही नहीं। इसके बाद विवाद बढ़ता हुआ संभागीय कार्यालय,राजस्व बोर्ड और अंततः राजस्थान उच्च न्यायालय तक पहुंच गया। लेकिन समाधान नहीं निकल पाया।

समिति के विधि सलाहकार अशोक भारद्वाज ने बताया कि कॉलोनी का विकास पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर हुआ और करीब छह साल तक सब कुछ सामान्य रहा। वर्ष 2008 में काश्तकारों ने 90B को चुनौती देते हुए जमीन बेचने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद मामला विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक स्तरों पर चला। लेकिन स्पष्ट समाधान नहीं निकल सका।

समिति संस्थापक अमन भारद्वाज ने बताया कि 8 अक्टूबर 2024 को वर्ष 2002 की उसी 90B को आधार बनाकर जयपुर विकास प्राधिकरण में नया नक्शा पेश किया गया और उसे मंजूरी भी मिल गई। नए नक्शे में भूखंडों के नंबर और आकार बदल दिए गए। जहां पहले से मकान बने हुए हैं, वहां 60 फीट सड़क दर्शा दी गई।

कॉलोनी वासियों का आरोप है कि जब जोन-12 कार्यालय में कैंप की सूचना जारी हुई तो 100 से अधिक कॉलोनीवासी वहां पहुंच गए और अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई। लोगों का आरोप है कि फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाया गया और उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। कॉलोनीवासी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ ही प्लॉट धारकों ने समय-समय पर थानों में शिकायत दी हैं और हाल ही में एक मामला भी दर्ज हुआ है। दस्तावेजों में हस्ताक्षर को लेकर फोरेंसिक जांच भी कराई गई थी। हालांकि अभी तक विवाद का अंतिम समाधान सामने नहीं आ पाया है। इसके अलावा समिति के पदाधिकारियों की ओर से यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को ज्ञापन सौंपा गया है।

साथ ही स्थानीय झोटवाड़ा विधायक राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मिलने का प्रयास किया गया है। लेकिन किसी प्रकार कोई रास्ता नजर नहीं आने और बीस सालों से किसी प्रकार का कोई न्याय नहीं मिलने पर कॉलोनी वासियों ने थक हार कर सरकार और प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है।

उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन,प्रदर्शन और विधानसभा घेराव जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि एक—एक पाई जोड कर खरीदी गई इस जमीन के लिए उन्हें आमरण-अनशन करने की जरूरत पड़ी तो वह परिवार सहित खडे है।

गौरतलब है कि करीब दो दशक से चल रहे इस विवाद में 80–85 वर्ष के बुजुर्गों से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार तक न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब नजर प्रशासन के अगले कदम पर है कि क्या इन परिवारों को उनका अधिकार मिल पाएगा या मामला फिर लंबित रह जाएगा।

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