जयपुर। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता हैं। कामदा एकादशी को फलदा एकादशी, कामना पूर्ण करने वाली और कांता एकादशी भी कहा जाता हैं। यह व्रत कष्टों को दूर करता हैं और इच्छित फल देता हैं। जो व्यक्ति इस व्रत का पालन करता हैं, उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिलती हैं।
कामदा एकादशी का व्रत जीवन में समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति लाता हैं। आचार्य गौरी शंकर शर्मा बोरखेड़ा ने बताया कि इस दिन निराहार या फलाहार व्रत रखकर श्रीमद् भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूजा के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन,वस्त्रादि का दान करें।
चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रविवार को सुबह 7:48 तक रहेगी। उदयातिथि होने से रविवार को ही कामदा एकादशी का व्रत किया जाएगा । इस दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने का शुभ समय सुबह 7:52 मिनट से दोपहर 12:29 मिनट तक रहेगा। सोमवार को व्रत का पारायण सुबह 6:18 से 7:51 के मध्य किया जाएगा ।




















