जवाहर कला केंद्र बना साहित्यिक संगम: चार कृतियों का विमोचन

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Jawahar Kala Kendra Becomes a Literary Confluence: Four Works Released
Jawahar Kala Kendra Becomes a Literary Confluence: Four Works Released

जयपुर। जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में माधव सिंह पालावत शोध प्रतिष्ठान हरमाड़ा जयपुर की ओर से रविवार को चार पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य एवं शोध से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर माधव सिंह पालावत लिखित पुस्तक ‘आवड़ कथा अनन्त’ तथा ‘बरवड़ी अन्नपूर्णा एवं शीशोपहारी बारू’, डॉ.शेफालिका पालावत लिखित ‘बारहठ ईसरदास : हरिरस एवं गुण निन्दा स्तुति’ व डॉ. सीमंतिनी पालावत लिखित भारतीय भाषाओं का नारी रचित प्रथम महाकाव्य ‘मेहाई करणी’ का लोकार्पण किया गया।

प्रो. अर्जुन देव चारण ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय ज्ञान और चारण परंपरा के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. अम्बा दान रोहड़िया बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। माधव सिंह पालावत, डॉ. शैफालिका पालावत, डॉ. सीमंतिनी पालावत ने अपनी कृतियों की पृष्ठभूमि का परिचय करवाया। डॉ. प्रकाश दान चारण, डॉ. दिनेश चारण ने शोध पत्रों का वाचन किया। वहीं डॉ. रूप सिंह बारैठ, जय भारत सिंह, डॉ.राजेन्द्र सिंह बारहठ ने राजस्थानी साहित्य पर अपने विचार रखे।

माधव सिंह पालावत ने कहा कि ‘मेहाई करणी’ राजस्थानी भाषा की मान्यता की आधारशिला बनेगी। ‘मेहाई करणी’ भारतीय भाषा में किसी महिला द्वारा रचित प्रथम महाकाव्य है जिसमें करणी माता की महिमा का बखान किया गया है। इस रचना में अनुपम साहित्यिक सौंदर्य झलकता है जो यह दर्शाता है कि राजस्थानी भाषा कितनी समृद्ध है।

वहीं ‘आवड़ कथा अनन्त’ शक्ति का पूर्णावतार मानी जाने वाली भगवती आवड़ की दिव्य कथा है, ‘बरवड़ी अन्नपूर्णा एवं शीशोपहारी बारू’ द्वारा चितौड़ में महाराणा हम्मीर के शासन की पुनर्स्थापना की कहानी वर्णित है। ‘बारहठ ईसरदास : हरिरस एवं गुण निन्दा स्तुति’ में राजस्थान व गुजरात में मान्यता प्राप्त प्रसिद्ध भक्त कवि ईसरदास बारहठ के कृतित्व को दर्शाया गया है।

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