श्रीराम मंदिर चंदा मामले पर अयोध्या सेवा समिति का बड़ा बयान: “राजनीतिक स्वार्थ के लिए आस्था से खिलवाड़ अनुचित”

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जयपुर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर निधि मामले में जारी एसआईटी जांच के बीच ‘श्री रामलला अयोध्याजी सेवा समिति, अयोध्याधाम’ के पदाधिकारियों ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपना पक्ष रखा। वैशाली नगर स्थित इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में सोम प्रदोष के अवसर पर आयोजित ‘सहस्त्रागढ़’ कार्यक्रम के दौरान समिति ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए विदेशी ताकतों के इशारे पर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री ने बताया कि “जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में एक रुपये का योगदान भी नहीं दिया, वे सवाल उठा रहे हैं। चंदा चोरी नहीं हुई, बल्कि लालच देकर ऐसा दृश्य गढ़ा गया ताकि सनातन धर्म को नीचा दिखाया जा सके। विरोधी सनातन, गाय, गीता और भारतीय संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को पचा नहीं पा रहे हैं।

मंदिर ट्रस्ट ने खुद खुफिया कैमरे लगाकर गड़बड़ी का पता लगाया था, जिस पर जांच चल रही है। दान गणना की व्यवस्था को अब और अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है। वही सुधीर शर्मा ने कहा कि देशभर के करोड़ों रामभक्तों ने अपनी श्रद्धा से सहयोग किया है। इस मामले पर बेवजह राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है और आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जो कभी सफल नहीं होगा।

अनिल झालानी ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। चढ़ावे की राशि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के जरिए समाज में भ्रम फैलाना पूरी तरह अनुचित है। पवन पारीक का कहना है कि समिति देशभर में दौरा कर जनता के सामने सच रखेगी और सनातन समाज को एकजुट रहने का आह्वान करेगी। श्रद्धालुओं के बीच किसी भी प्रकार का भ्रम फैलने नहीं दिया जाएगा।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान समिति के अन्य पदाधिकारियों ने भी रामभक्तों से संयम और सजगता बरतने का आग्रह किया है। विजेंद्र गौड़ ने अपील की कि लोग सोशल मीडिया या राजनीतिक बयानों के आधार पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें। केवल अधिकृत जांच और प्रमाणित जानकारी को ही आधार बनाएं। आशुतोष गुप्ता ने कहा कि राम के नाम पर समाज को जोड़ने की जरूरत है, तोड़ने की नहीं।

आस्था किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। बलराम सिंह अयोध्या एवं आचार्य पं. प्रहलाद शर्मा ने जोर देकर कहा कि राम भारत की सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। मंदिर से जुड़ी हर गतिविधि को तथ्य, पारदर्शिता और मर्यादा के साथ देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विवादों के चश्मे से।

समिति पदाधिकारियों ने संदेश दिया कि सोम प्रदोष जैसे धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति को मजबूत करते हैं और श्रद्धालुओं को किसी भी बहकावे में आए बिना भगवान श्रीराम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा और सेवा—का पालन करना चाहिए।

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